शुक्रवार, 14 मार्च, 2008 को 14:16 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान की एक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति और पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों में अंतिम मामला भी ख़ारिज कर दिया है.
आसिफ़ अली ज़रदारी के वकील ने शुक्रवार को कहा कि सरकार पिछले ग्यारह साल में उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ कोई भी मामला साबित करने में नाकाम रही है.
अदालत ने आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ लगे भ्रष्टाचार के छह अन्य मामले पिछले सप्ताह ख़ारिज कर चुकी थी और शुक्रवार को अंतिम मामला भी ख़ारिज होने के बाद ज़रदारी भ्रष्टाचार के आरोपों से बिल्कुल बरी नज़र आते हैं.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के बीच अक्तूबर 2007 में एक समझौता हुआ था जिसके तहत बेनज़ीर भुट्टो को स्वदेश वापसी की इजाज़त दी गई थी.
उसी समझौते में यह भी कहा गया था कि बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को भी वापिस लिया जाएगा.
पाकिस्तान के आम चुनाव में 18 फ़रवरी को हुए मतदान में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी सबसे बड़ी विजेता पार्टी के रूप में उभरी है और उसने एक अन्य प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने की बात कही है.
ज़रदारी को भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी करने का अदालत का यह फ़ैसला राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के अक्तूबर 2007 में बेनज़ीर भुट्टो के साथ हुए उस समझौते की रौशनी में आया है जिसमें राजनीतिक नेताओं के ख़िलाफ़ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को वापस लेने की बात कही गई थी.
उस समझौते को विभिन्न अदालतों में चुनौती दी गई थी लेकिन कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया था. जिसके बाद सरकार के लिए यह रास्ता खुल गया था कि वह अदालतों से राजनीतिक नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप वापिस लेने की गुज़ारिश कर सकती है.
आसिफ़ अली ज़रदारी हालाँकि ख़ुद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी में एक प्रभावशाली नेता बन चुके हैं लेकिन उन्होंने ख़ुद को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया है. पाकिस्तान में 18 फ़रवरी को हुए चुनाव के बाद गठबंधन सरकार बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं.
ग़ौरतलब है कि दिसंबर 2007 में रावलपिंडी में हुए एक आत्मघाती हमले में बेनज़ीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी.
आसिफ़ अली ज़रदारी भ्रष्टाचार के आरोपों में आठ साल जेल में रह चुके हैं और उन्हें 2004 में ज़मानत पर रिहा किया गया था.