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जूलियन जॉयस
बीबीसी न्यूज़

काश वे मेरी बात मान लेते

ब्रिटेन की पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ता अगर 12 साल की रुख़साना की गुहार सुन लेते तो उसकी ज़िंदगी कुछ और ही होती.

रुख़साना (नाम बदला हुआ है) का कहना है कि उसने शिकायत की थी कि उसके पिता उसे पाकिस्तान ले जा कर जबरन विवाह करा देना चाहते हैं लेकिन किसी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया.

रुख़साना का कहना है कि उसे एक ऐसे देश ले जाया गया जो उसका अपना नहीं था और वहाँ उसकी शादी एक ऐसे इंसान से कर दी गई जिसने लगातार बेदर्दी से उसका बलात्कार किया और पंद्रह साल की उम्र में वह गर्भवती हो गई.

किसी तरह से भागने में कामयाब होने के बाद अब रुख़साना इंगलैंड के एक शरणार्थी गृह में अपने बच्चे के साथ जीवन गुज़ार रही है.

रुख़साना को अफ़सोस इस बात का है कि उसे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी. वह कहती हैं, "जब मैं स्कूल में थी तो अंग्रेज़ी, गणित और विज्ञान में मेरे सबसे ज़्यादा अंक आते थे. मैं यूनिवर्सिटी जाना चाहती थी-लेकिन स्कूल ही पूरा नहीं कर पाई".

घरेलू हिंसा की जानकारी

एक बार उसके स्कूल में घरेलू हिंसा के बारे में एक लेक्चर हुआ था और उसे बताया गया कि अगर उन बच्चियों के साथ ऐसा हो तो उन्हें क्या करना चाहिए.

कुछ दिन बीतने पर जब रुख़साना को एहसास हुआ कि उसके साथ ज़बरदस्ती होने जा रही है तो उसने पुलिस को फ़ोन किया.

वह कहती है, "पुलिस वालों को मैंने बताया कि मेरे पिता मुझे पाकिस्तान ले जा कर ज़बरदस्ती मेरी शादी करा देना चाहते हैं तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं घबराऊँ नहीं. वे ऐसा कुछ नहीं होने देंगे".

उसके बाद पुलिस आई ज़रूर लेकिन रुख़साना से अलग से बात करने के बजाय उसके घरवालों के सामने उससे पूछताछ हुई.

ज़ाहिर है, इससे नतीजा यही निकला कि रुख़साना ने शिकायत की है और जो काम कुछ रुक कर होना था उसमें तेज़ी आ गई.

एक दिन रुख़साना के पिता ने कहा कि वे सब छुट्टियाँ मनाने पाकिस्तान जा रहे हैं और महीने-दो महीने में वापस आ जाएँगे.

अब कुछ नहीं हो सकता

रुख़साना कहती है कि विमान में सवार होने के बाद उसे बताया गया कि वहाँ उसकी शादी होने जा रही है और अब वह कुछ नहीं कर सकती.

पाकिस्तान में शादी के बाद भी रुख़साना सोचती रही कि ब्रिटेन की पुलिस उसकी तलाश में ज़रूर आएगी.

वह सोचती थी स्कूल वाले उसे ढूँढेंगे. लेकिन कोई नहीं आया. मैं अकेली यह सब झेलती रही.

दो साल बाद वह ब्रिटेन आई और वहाँ उसने अपने बच्चे को जन्म दिया.

उसका पति भी आया लेकिन वह उसकी ओर निष्ठुर ही बना रहा और अंततः रुख़साना ने उससे अलग होने का फ़ैसला कर लिया.

घर वालों ने इज़्ज़त की दुहाई दी लेकिन रुख़साना किसी तरह वहाँ से भाग आई और उसने बेसहारा लोगों के लिए बनाए गए एक गृह की शरण ले ली.

अब वह अपने रिश्तेदारों से बचती फिर रही है क्योंकि उसे डर है कि उस पर यह ठप्पा लगा दिया गया है कि उसकी वजह से घरवालों का सर नीचा हुआ है.

वह अपनी दुर्दशा के लिए अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराती है.

अगर सुन लिया होता...

"अगर उन्होंने मेरी बात पर ध्यान दिया होता तो मेरी ज़िंदगी ऐसी न होती. मुझे लगता है यहाँ की पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जबरन शादी के बारे में मालूम नहीं है या उन्हें लगता है कि यह एशियाइयों का मामला है और गोरों के साथ तो होता नहीं है".

वह कहती है, "गोरों के बच्चे सहायता के लिए फ़ोन करते हैं तो उनकी बात सुनी जाती है लेकिन एशियाई बच्चे ऐसा करें तो उसे शिकायत माना जाता है".

उसे अपने माँ-बाप से भी शिकायत नहीं है. वह कहती है, "वे जानते हैं कि इस्लाम में जबरन विवाह ग़लत माना जाता है लेकिन वे परंपराओं से बंधे हैं".

उन्हें लगता है कि यह ठीक है क्योंकि उनके साथ भी ऐसा ही हो चुका है.

अपने इस अनुभव के बावजूद रुख़साना अब भी अपने जैसे लोगों को यही सलाह देती है कि ऐसी स्थिति में अधिकारियों से मदद मांगे.

उसे उम्मीद है कि अब जबरन विवाह के बारे में इतना प्रचार हो जाने के बाद शायद पुलिस और अन्य अधिकारी इस बारे में जागरूक हो गए होंगे और इस तरह की गुहार को गंभीरता से लेंगे.