सोमवार, 10 मार्च, 2008 को 21:47 GMT तक के समाचार
हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला से सोमवार को शुरू हुआ निर्वासित तिब्बतियों का एक पैदल मार्च शुरु होने के कुछ समय बाद ही रोक दिया गया.
भारतीय पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि सौ से ज़्यादा की तादाद में तिब्बत की ओर बढ़ रहे इन प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया है.
सोमवार को धर्मशाला से 100 से भी ज़्यादा तादाद में भारत में रह रहे निर्वासित तिब्बतियों का एक जत्था चीन में हो रहे ओलंपिक खेलों का विरोध करने के लिए रवाना हुआ था.
प्रदर्शनकारियों के इस जत्थे ने चीनी शासन के ख़िलाफ़ तिब्बतियों की बगावत की 49 साल पूरे होने के मौक़े पर ये मार्च शुरु किया था.
वे बीजिंग ओलंपिक के दौरान चीनी शासन के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे पर पुलिस ने उन्हें धर्माशाला की सीमा के ही बाहर नहीं जाने दिया.
उधर नेपाल में भी क़रीब एक हज़ार तिब्बत मूल के लोगों की पुलिस से उस वक्त झड़पें हो गईं जब वे चीनी दूतावास पहुँचकर अपना विरोध दर्ज करना चाह रहे थे.
चीन को लेकर चिंता
ग़ौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से तिब्बत पर चीन का वर्चस्व क़ायम है. इसका चीन के कई लोग और धार्मिक गुरू विरोध करते रहे हैं और तिब्बत की स्वायत्तता की माँग करते रहे हैं.
सोमवार को धर्मशाला से तिब्बतियों की यात्रा शुरू होने पर उनके निर्वासित आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि चीन पर उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड के संदर्भ में और दबाव बनाने की ज़रूरत है.
दलाई लामा ने कहा कि उन्हें चीन में ओलंपिक खेल होने से कोई आपत्ति नहीं है.
उनका कहना था कि इससे विश्व को ये मौक़ा मिलता है कि चीनी सरकार पर दबाव बनाया जा सके कि वह ओलंपिक के आदर्श मूल्यों- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता को कायम करे.
प्रदर्शनकारियों की योजना थी कि वे भारत से रास्ते तिब्बत की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश करेंगे पर कांगड़ा ज़िले के पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रदर्शनकारी को ज़िले की सीमा से बाहर जाने तक की इजाज़त नहीं हैं.
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जो भी ज़िले की सीमा से बाहर जाकर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगा, उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.