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सोमवार, 10 मार्च, 2008 को 08:23 GMT तक के समाचार

क्रिस मौरिस
बीबीसी संवाददाता, धर्मशाला से

विरोध जताने निकले निर्वासित तिब्बती...

भारत में निर्वासन का जीवन व्यतीत कर रहे तिब्बत के लोगों में से सौ लोगों ने तिब्बत पर चीन के शासन का विरोध करने के लिए हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला से पैदल मार्च शुरु किया है.

चीनी शासन के ख़िलाफ़ तिब्बतियों की बगावत की 49 साल पूरे होने के मौक़े पर प्रदर्शनकारियों ने ये मार्च शुरु किया है.

वे बीजिंग ओलंपिक के दौरान चीनी शासन के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं.

चीन का मानवाधिकार रिकॉर्ड

उधर धर्मशाला में तिब्बतियों के निर्वासित आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा ने इस मौक़े पर अपने भाषण में कहा है कि चीन पर उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड के संदर्भ में और दबाव बनाने की ज़रूरत है.

दलाई लामा ने कहा कि उन्हें चीन में ओलंपिक खेल होने से कोई आपत्ति नहीं है.

उनका कहना था कि इससे विश्व को ये मौक़ा मिलता है कि चीनी सरकार पर दबाव बनाया जा सके कि वह ओलंपिक के आदर्श मूल्यों - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता को कायम करे.

दलाई लामा का कहना था, "चीन को ख़ुद को ओलंपिक का अच्छा मेज़बान साबित करना चाहिए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कायम करनी चाहिए. दुनिया के देशों को चाहिए कि चीन में अपने एथलीट भेजने के साथ-साथ वह चीन की सरकार को इन मुद्दों की भी याद दिलाए."

सीमा में प्रवेश

उधर प्रदर्शनकारियों की योजना है कि वे भारत से रास्ते तिब्बत की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश करेंगे, लेकिन वे यह नहीं बता रहे हैं कि वे कहाँ और कब ऐसी कोशिश करेंगे.

निर्वासित तिब्बती गुट ओलंपिक के चलते चीन पर केंद्रित लोगों के ध्यान का फ़ायदा अपने मुद्दों के प्रचार के लिए उठाना चाहते हैं.

इनमें से कुछ लोग तो अपने आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से भी ज़्यादा कट्टर हैं.

दलाई लामा ने कहा है कि वे अब तिब्बत की स्वतंत्रता की वकालत नहीं करते और न ही वे ओलंपिक के बहिष्कार का समर्थन करते हैं.