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रविवार, 09 मार्च, 2008 को 07:43 GMT तक के समाचार

बराक मिसाइल सौदे का अभियुक्त गिरफ़्तार

भारत की केंद्रीय जाँच एजेंसी यानी सीबीआई ने बराक मिसाइल सौदे में दलाली के मामले में अभियुक्त संजीव नंदा और उनके बेटे को गिरफ़्तार किया है.

इन दोनों के अलावा सीबीआई ने आयकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आशुतोष कुमार और चार्टड अकाउंटेंट बिपिन शाह को भी गिरफ़्तार किया है.

इन चारों लोगों को बैंक खातों के साथ छेड़-छाड़ की कोशिश करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.

आशुतोष कुमार और बिपिन शाह पर सुरेश और संजीव नंदा के ज़ब्त किए गए बैंक खातों के साथ छेड़छाड़ करने में मदद देने का आरोप है.

इन बैंक खातों को आयकर विभाग ने पिछले साल ज़ब्त कर दिया था. सीबीआई का कहना है कि सुरेश और संजीव नंदा ने इन दोनों के साथ मिलकर खातों में हेरफेर करने की कोशिश की थी.

सीबीआई ने इसी महीने की तीन तारीख को सुरेश और संजीव नंदा के पासपोर्ट विदेश मंत्रालय से चार हफ़्तों के लिए निलंबित करवाए थे.

बराक सौदा

23 अक्तूबर 2000 में तत्कालीन एनडीए सरकार ने इसराइल से बराक एंटी मिसाइल सिस्टम का सौदा किया था.

1150 करोड़ रुपए के इस सौदे की जांच सीबीआई कर रही है.

हालांकि, नंदा इस सौदे में किसी भी तरह की धोखाधड़ी से इनकार करते आए हैं.

सुरेश नंदा पूर्व नौसेना प्रमुख एसएम नंदा के बेटे हैं.

इस रक्षा सौदे में हुए धांधली की सीबीआई जांच के दौरान भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस और पूर्व नौसेना प्रमुख सुशील कुमार के नाम भी सामने आए थे.

सीबीआई पहले ही साफ़ कर चुकी है कि इस मामले में जॉर्ज फर्नांडिस और सुशील कुमार से भी पूछताछ की जा सकती है.

उधर, पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने आरोपों से इनकार कर चुके हैं. उनका आरोप है कि ये सब कुछ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इशारे पर हो रहा है.

क्या है ये सौदा ?

जाँच एजेंसी सीबीआई का कहना था कि बराक मिसाइल ख़रीद मामले में कथित दलाली के तहत करीब दो करोड़ रुपए लिए गए.

सीबीआई ने अपनी एफ़आईआर में दर्ज किया है कि समता पार्टी की अध्यक्ष जया जेटली को सात बराक मिसाइलों के सौदे के दौरान कथित तौर पर दो करोड़ रुपए की दलाली दी गई थी.

इस दौरान समता पार्टी के अध्यक्ष जया जेटली ही थीं.

इसराइल की सरकारी रक्षा कंपनी इसराइल एयरक्राफ़्ट इंडस्ट्री के साथ सात बराक एंटी मिसाइल सिस्टम और 200 मिसाइलों का सौदा किया गया था.

इन एंटी मिसाइल प्रणाली को नौसेना के युद्धपोतों पर लगाया जाना था.

इन सौदों का तत्कालीन रक्षा अनुसंधान विकास संगठन डीआरडीओ के अध्यक्ष ने विरोध भी किया था जिसे की दरकिनार कर दिया गया था.

जॉर्ज फर्नांडिस ने न सिर्फ़ इस सौदे को हरी झंडी दे दी थी बल्कि इसे रक्षा मामलों से जुड़ी कैबिनेट समिति से भी मंज़ूरी दिलवा दी थी.

2001 में सामने आए तहलका के स्टिंग ऑपरेशन से ये पूरा मामला उजागर हुआ था.

इस मामले के सामने आने पर जॉर्ज फर्नांडिस ने सफ़ाई दी थी कि उन्होंने इस सौदे को मंज़ूरी पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की तरफ़ से हरी झंडी मिलने के बाद दी थी.

एपीजे अब्दुल कलाम उस वक्त रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहाकार हुआ करते थे.

लेकिन, सीबीआई ने अपनी जांच के बाद ये कहा था कि 23 जून 1999 को कलाम ने बराक मिसाइल के बारे में उंगली उठाई थी.