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शनिवार, 08 मार्च, 2008 को 18:23 GMT तक के समाचार

हज़ारों ने किया 'कार्टून' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

इस्लाम के पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद का अपमान करने वाले कार्टून को फिर से प्रकाशित करने के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान में हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन किया है.

पुलिस का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी शहर हेरात में हुए इस प्रदर्शन में दस हज़ार से अधिक लोगों ने इकट्ठे होकर डेनमार्क की निंदा की.

इन लोगों ने नीदरलैंड की उस फ़िल्म की भी निंदा की जिसमें क़ुरआन की निंदा की गई है.

तीन दिन पहले कोई 200 अफ़ग़ान सांसदों ने भी इस मामले में विरोध प्रदर्शन किया था.

उल्लेखनीय है कि इस कार्टून को डेनमार्क के अख़बारों में एक बार फिर से प्रकाशित किया गया है. जबकि क़ुरआन की निंदा करने वाली फ़िल्म का निर्माण नीदरलैंड के एक धुर-दक्षिणपंथी सांसद ग्रीट वाइल्डर्स ने किया है.

बड़ा प्रदर्शन

हेरात में शनिवार को हुआ प्रदर्शन पिछले दो हफ़्तों में अफ़ग़ानिस्तान में हुआ सबसे बड़ा प्रदर्शन है.

हज़ारों प्रदर्शनकारी हेरात के मुख्य स्टेडियम में जमा हुए. उन्होंने डेनमार्क और नीदरलैंड के ख़िलाफ़ नाराज़गी भरे नारे लगाए और दोनों देशों पर इस्लाम का अपमान करने का आरोप लगाया.

एक प्रदर्शनकारी मीर फ़ारुक़ हुसैनी ने अमरीका और उसके सहयोगी देशों पर इस्लाम के अपमान का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, "डेनमार्क में जो कुछ हुआ और अमरीका के नेतृत्व में पूरी दुनिया में जो कुछ हो रहा है, हम उसका विरोध कर रहे हैं."

अफ़ग़ानिस्तान में हो रहे प्रदर्शन 2006 के बाद सबसे बड़े प्रदर्शन हैं.

अफ़ग़ानिस्तान एक इस्लामिक गणतंत्र है और वहाँ पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद और क़ुरआन की निंदा करने के लिए मौत की सज़ा दी जा सकती है.

उल्लेखनीय है कि डेनमार्क में यह कार्टून वर्ष 2006 में प्रकाशित किया गया था और उस समय इसके विरोध ने हिंसक रूप ले लिया था. विरोध प्रदर्शन में कई लोग मारे गए थे.

दो साल बाद, पिछले महीने डेनमार्क के प्रमुख अख़बारों ने इन कार्टूनों में से एक का फिर से प्रकाशन कर दिया है.

अख़बारों ने यह क़दम तब उठाया जब पुलिस ने कहा कि उस कलाकार को मारने का षडयंत्र रचा गया था जिसने वे 12 कार्टून बनाए थे, जिससे मुस्लिम देशों में नाराज़गी फैल गई थी.