शुक्रवार, 07 मार्च, 2008 को 23:58 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान की जेलों में 35 साल बिताकर भारत लौटे कश्मीर सिंह ने जहाँ माना है कि वे भारतीय जासूस थे, वहीं उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर किया कि सरकारों ने उनके और उनके परिवार के लिए कुछ नहीं किया.
कश्मीर सिंह और उनकी पत्नी परमजीत कौर ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऐसा कहा है.
कश्मीर सिंह ने कहा, "जासूस के तौर पर मुझे जो ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई थीं, मैनें उन्हें निभाया....मेरी गिरफ़्तारी के बाद भारत में बनी विभिन्न सरकारों ने मेरे लिए कुछ नहीं किया...सरकार ने मेरे परिवार पर कोई ख़र्च करना ज़रूरी नहीं समझा..."
कश्मीर सिंह का कहना था कि जब वे जासूस की नौकरी करते थे तब उन्हें 400 रुपए का मासिक वेतन मिलता था और वे अपने देश भारत की सेवा करते हुए पाकिस्तान गए थे.
'17 साल तक बेड़ियों में ही रहा'
कश्मीर सिंह की पत्नी परमजीत कौर ने बताया, "मेरे पति के बलिदान के लिए वर्ष 1978 में सरकार ने मुझे 5000 रुपए दिए थे."
परमजीत कौर का कहना था कि उन्हें लोगों के घर पर काम कर अपने परिवार का ख़र्च चलाना पड़ा और ये बोझ और भी बढ़ गया जब उनके एक बेटे शिशपाल सिंह पोलियो से ग्रस्त हो गए.
पत्रकारों के साथ बातचीत में पाकिस्तान में अपनी क़ैद के बारे में कश्मीर सिंह ज़्यादा कुछ कहने से हिचकिचाते रहे.
लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा, "मुझे अंधेरी कोठरी में अकेले रखा गया और लगभग 17 साल तक तो मैं बेड़ियों में ही रहा. क़ैदियों को रिहा कराने की ये सब बातें केवल काग़जों पर ही हैं. दरअसल (भारत) सरकार ने मुझे रिहा कराने की कोई कोशश नहीं की और मेरा रिहाई 35 साल की क़ैद के बाद पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी की कोशिशों के कारण संभव हुई."
लेकिन जब उनसे पूछा गया कि भारत की कौन सी सुरक्षा एजेंसी ने उन्हें पाकिस्तान भेजा था, तो उनका कहना था कि जब 23 महीने की यातनाओं के बाद उन्होंने ये बात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को नहीं बताई तो वे ये बात पत्रकारों को कैसे बता देंगे?