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गुरुवार, 06 मार्च, 2008 को 11:41 GMT तक के समाचार

श्रीलंका सरकार पर अपहरण के आरोप

अमरीका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच (एचआरड्ब्ल्यू) के अनुसार लोगों का बलपूर्वक अपहरण करने के मामलों में श्रीलंका सरकार का रिकॉर्ड दुनिया में सबसे बुरा है.

संगठन ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि लिबरेशन टाइगर ऑफ़ तमिल इलम (एलटीटीई) के लड़ाकों के साथ 2006 में लड़ाई फ़िर शुरू होने के बाद से श्रीलंका के सुरक्षा बलों और सरकार समर्थित हथियारबंद दस्तों ने अब तक सैकड़ों युवाओं का अपहरण किया है."

तमिल हैं निशाने पर

रिपोर्ट के अनुसार जिनका अपहरण किया गया है, उनमें से अधिकांश तमिल हैं.

इस मानवाधिकार संस्था के मुताबिक इनका अपहरण एलटीटीई से संबंधित होने के शक के कारण किया गया है. कई युवाओं को डर हैं कि कहीं उनकी हत्या न कर दी जाए.

श्रीलंका सरकार ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है.

श्रीलंका के विदेश सचिव पालिथा कोहाना कहते हैं, "एचआरड्ब्ल्यू ने वास्तविक परिस्थितियों को बढ़ाचढ़ाकर पेश किया है." उनका कहना है कि पिछले 12 महीनों में लोगों के 'ग़ायब होने के मामलों की संख्या में गिरावट आई है.'

सरकार का जवाब

उन्होंने कहा कि एचआरड्ब्ल्यू की यह 'झूठी' रिपोर्ट अप्रमाणिक आरोपों पर आधारित है, जबकि सरकार ने इस तरह के आरोंपों की तत्काल जांच कर कार्रवाई थी.

एलटीटीई की श्रीलंका सरकार से तीन दशक पहले शुरू हुई लड़ाई में अब तक दस हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

संगठन का दावा है कि जबसे श्रीलंका सरकार और तमिल लड़ाकों की लड़ाई में तेज़ी आई है तबसे लोगों के गायब होने के सैकड़ों मामले प्रकाश में आए हैं.

अधिकांश मामलों में सेना, नेवी और पुलिस जैसी सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं.

एचआरड्ब्ल्यू की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भगोड़ा घोषित कमांडर कर्नल करुणा के नेतृत्व वाले सरकार समर्थित हथियारबंद तमिल समूह ने भी अपहरण की कुछ वारदातों को अंज़ाम दिया है.

ग़ायब हुए अधिकांश लोगों के मारे जाने की आशंका है.

सरकार से अपील

एचआरड्ब्ल्यू ने कहा कि इस मामले में श्रीलंका सरकार कि प्रतिक्रिया 'अधूरी' है.

संगठन ने श्रीलंका सरकार से अपील की है कि वह ग़ायब हुए लोगों का पता लगाए और दोषी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.

एचआरड्ब्ल्यू की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों से तमिल लड़ाकों द्वारा लोगों की गायब करने की घटनाएं तुलनात्मक रूप से कम हुईं.

रिपोर्ट के अनुसार लोगों की हत्या, अपनी सेना में बच्चों की ज़बरन भर्ती करने, आम लोगों पर बमों से हमले करने और एलटीटीई के नियंत्रण वालों इलाकों में बुनियादी अधिकारों के दमन के लिए तमिल लड़ाके ज़िम्मेदार हैं.