गुरुवार, 06 मार्च, 2008 को 03:59 GMT तक के समाचार
मीडिया में आ रही ख़बरों के अनुसार राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की सज़ा माफ़ी की अपील को ख़ारिज कर दिया है.
सरबजीत सिंह को 1990 में लाहौर और फ़ैसलाबाद में हुए चार बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था और अदालत ने उन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई थी.
पाकिस्तान की समाचार एजेंसी एनएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सरबजीत सिंह की माफ़ी की अपील राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने 'विचार करने के बाद' ख़ारिज कर दी है.
एजेंसी ने कहा है कि अब सरबजीत की फाँसी के आदेश कभी भी दिए जा सकते हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सरबजीत सिंह के वकील राणा अब्दुल हमीद ने लाहौर से कहा है कि सज़ा माफ़ी की अपील ख़ारिज हो जाने की सूचना अभी अधिकृत तौर पर उन्हें नहीं दी गई है.
सरबजीत सिंह की बहन दलबीर सिंह ने अमृतसर में पीटीआई से कहा है कि उन्होंने पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी और राणा अब्दुल हमीद से बात की है लेकिन किसी ने भी अपील ख़ारिज हो जाने की पुष्टि नहीं की है.
उन्होंने कहा है कि वे अंतिम साँस तक सरबजीत की रिहाई के लिए लड़ती रहेंगी.
पाकिस्तान की जेल में पिछले 35 सालों से क़ैद कश्मीर सिंह को माफ़ी दिए जाने के बाद सरबजीत सिंह के क़रीबी लोगों को भी उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी थी.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर सिंह को रिहा करने का ऐलान किया था और अब कश्मीर सिंह अपने परिवार के पास भारत लौट चुके हैं.
सज़ा
पाकिस्तान में फाँसी की सज़ा झेल रहे सरबजीत सिंह को पाकिस्तान में मंजीत सिंह बताया जा रहा है.
उन पर जासूसी और 1990 में कई बम धमाके करवाने का आरोप है जिसमें 14 लोग मारे गए थे.
लेकिन सरबजीत के परिवारवालों का कहना है कि वो एक निर्दोष किसान हैं और उनको भूल से कोई और समझकर पकड़ लिया गया है.
उन पर लाहौर की एक अदालत में मुक़दमा चला और 1991 में उनको मौत की सज़ा सुना दी गई. निचली अदालत की ये सज़ा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बहाल रखी.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी जिसे 2006 में ख़ारिज कर दिया गया था.
दो साल पहले राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा था कि वे सरबजीत सिंह के मामले में सभी क़ानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद सज़ा माफ़ी की उनकी अपील पर फ़ैसला देंगे.
लेकिन उनका फ़ैसला भी नकारात्मक रहा है.
अंतिम साँस तक लड़ाई
कश्मीर सिंह की रिहाई की ख़बरों के बाद सरबजीत सिंह के क़रीबी लोगों के मन में एक आस जग गई थी.
उनकी बहन दलबीर कौर ने सरबजीत की रिहाई के लिए बहुत कोशिशें की हैं. जिसमें वाघा सीमा पर जाकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को संबोधित एक ज्ञापन सौंपना भी शामिल है.
कश्मीर सिंह की रिहाई की ख़बर आने के बाद दलबीर कौर ने कहा था, "कश्मीर सिंह की रिहाई की बात सुनकर मेरा मन ख़ुश भी हुआ और उदास भी हुआ. ख़ुश इसलिए हुआ क्योंकि कश्मीर और सरबजीत सिंह दोनो के मामले मिलते-जुलते हैं इसलिए कश्मीर सिंह की रिहाई से सरबजीत सिंह का रास्ता भी खुल सकता है. मेरा मन उदास इसलिए है क्योंकि अच्छा होता अगर कश्मीर सिंह के साथ सरबजीत सिंह को भी रिहा कर दिया जाता."
लेकिन अब जबकि अपील ख़ारिज होने की ख़बरें आ रही हैं तब उन्होंने कहा है कि वे अंतिम साँस तक उम्मीद नहीं छोड़ेंगी.