रविवार, 02 मार्च, 2008 को 20:30 GMT तक के समाचार
पहला हलफ़नामा वापिस लिए जाने के पाँच महीने बाद केंद्र सरकार ने विवादास्पद सेतुसमुद्रम परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट में नया हलफ़नामा पेश कर दिया है.
इस हलफ़नामें में केंद्र सरकार ने कहा है कि आस्था से जुड़े मुद्दों को वैज्ञानिक सबूतों से नहीं सुलझाया जा सकता, इसलिए परियोजना को हरी झंडी दी जाए.
60 पन्ने के इस नए हलफ़नामे को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंज़ूरी दी गई और इसे रविवार को अदालत में दाख़िल किया गया.
इसमें कहा गया है, "दो साल पहले परियोजना का विरोध शुरु हुआ जो ग़लत था और वह तथ्यों पर आधारित नहीं था और अदालत को इसे नहीं रोकना चाहिए."
सरकार ने कहा है कि पाँच अक्तूबर 2007 को गठित विशेषज्ञ समिति ने परियोजना की समीक्षा की है जिसमें भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र में एलाइनमेंट नंबर छह को ही परियोजना के लिए उचित पाया गया.
परियोजना का विरोध करने वालों का कहना है कि एलाइनमेंट नंबर छह 'रामसेतु' का हिस्सा है और इससे छेड़छाड़ करना उचित नहीं है.
इस प्रस्तावित परियोजना पर पिछले साल सितंबर में दाख़िल हलफ़नामे में कहा गया था कि कथित तौर पर मानवनिर्मित 'रामसेतु' का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. इसमें भगवान राम के अस्तित्व को भी कपोलकल्पित बताया गया था.
इस हलफ़नामे पर भारी विरोध के बाद केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया था.