बुधवार, 27 फ़रवरी, 2008 को 19:27 GMT तक के समाचार
सत्ता के खेल में पिछले दिनों भले ही पाकिस्तान में भुट्टो परिवार सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा हो पर उनकी वतन वापसी को न्यायालय में दी गई चुनौतियाँ अभी ख़त्म नहीं हुई हैं.
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भुट्टो परिवार की वापसी को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को विचाराधीन रखा है. हालांकि तीन याचिकाएं ख़ारिज कर दी गई है.
ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भुट्टो परिवार को उनपर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों से राहत दी थी ताकि उनकी वतन वापसी का रास्ता साफ़ हो सके.
ऐसा इसलिए किया गया था ताकि देश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए राजनीतिक विकल्पों को मौका दिया जा सके.
भ्रष्टाचार के जिन मामलों को निष्प्रभावी कर दिया गया था वो 80 औऱ 90 के दशक के मामले थे जिस दौरान पाकिस्तान में बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ की सरकारें रही थीं.
पर भ्रष्टाचार के इन मामलों से राहत को बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी और इस तरह से राहत दिए जाने पर सवाल उठाए गए थे.
इनमें से तीन याचिकाओं को तो सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है पर अभी भी दो याचिकाएं विचाराधीन हैं.
लोकतंत्र की राह
जानकार मानते हैं कि अगर इन बाकी बची याचिकाओं को सही पाया जाता है तो यह नई अड़चनें खड़ी कर सकती हैं.
पाकिस्तान में हाल ही में आम चुनाव संपन्न हुए हैं पर वहाँ किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.
भुट्टो परिवार के नेतृत्व वाली पीपीपी सबसे ज़्यादा सीटें जीतकर संसद में पहुँची है और नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पीएमएलएन दूसरे नंबर पर है.
दोनों दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर प्रयास तो चल रहे हैं पर अभी तक कोई अंतिम स्थिति नहीं तय हो पाई है.
इस बीच सुप्रीम कोर्ट से आया ताज़ा फ़ैसला उन न्यायाधीशों ने तय किया है जिन्हें पिछले वर्ष देश में आपातकाल के दौरान न्यायालय में नियुक्त किया गया था.
हालांकि बेनज़ीर भुट्टो की पिछले वर्ष दिसंबर में ही एक हमले में हत्या हो गई थी पर उनके पति आसिफ़ अली ज़रदारी अभी भी पाकिस्तान में हैं और सबसे प्रभावी पार्टी के कार्यवाहक की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं.
उधर नवाज़ शरीफ़ भी उपचुनावों में हिस्सा लेने की बात कह चुके हैं और ऐसा संकेत दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री बनने के लिए रास्ता साफ़ करने में वो कोई कसर नहीं रखेंगे.