सोमवार, 25 फ़रवरी, 2008 को 10:00 GMT तक के समाचार
भारत में गिरफ़्तार एक प्रमुख माओवादी नेता को एक सप्ताह के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.
हिमाद्रि सेन रॉय उर्फ़ कामरेड सोमेन को पश्चिम बंगाल के पूर्वी हिस्से से शनिवार को गिरफ़्तार किया गया था. उन पर भारत सरकार के ख़िलाफ़ हिंसक अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है.
राज्य की अदालत ने उन्हें सात मार्च तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया है. पुलिस का कहना है कि इस बीच उनसे पूछताछ की जाएगी.
भारत में पिछले 20 सालों से माओवादी विद्रोहियों की हिंसक गतिविधियाँ चल रही है जिसमें अब तक क़रीब 60 हज़ार लोग मारे गए हैं.
पुलिस ने हिमाद्रि सेन रॉय पर ग़ैरक़ानूनी रूप से हथियार रखने और पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों में हुई हत्याओं की श्रृंखला में शामिल होने का आरोप भी लगाया है.
साठ वर्षीय नेता हिमाद्रि सेन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रमुख हैं और पार्टी की ताकतवर पोलितब्यूरो के सदस्य भी हैं.
सबसे बड़ा ख़तरा
उन्हें एक रेलवे स्टेशन पर रेल से उतरते वक्त गिरफ़्तार किया गया.
इस नेता के नज़दीकी और विश्वासपात्र देबा को भी उनके साथ गिरफ़्तार किया गया.
पश्चिम बंगाल के एक और माओवादी नेता सुशील रॉय की ग़िरफ़्तारी के दो साल बाद हुई यह ग़िरफ़्तारी माओवादियों के लिए बहुत बड़ा नुकसान है.
सुशील रॉय उस वक्त बंगाल इकाई का नेतृत्व कर रहे थे और हिमाद्रि सेन की ही तरह माओवादी पोलितब्यूरो के सदस्य भी थे.
माओवादी पूर्वी और मध्य भारत के अनेक राज्यों में सक्रिय है
उनका मुख्य ध्यान उन क्षेत्रों में है जहाँ के लोग बहुत गरीब है लेकिन जहाँ भरपूर खनिज संपदा है.
विद्रोहियों का कहना है कि वे बेघर किसानों और कबायली समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
पिछले काफ़ी समय से वे पूर्वी और मध्य भारत में सुरक्षा बलों के ऊपर हिंसक हमले कर रहे हैं. इनमें उड़ीसा के नयागढ़ ज़िले में कुछ पुलिस चौकियों पर किए गए हमले सबसे ज़्यादा निकृष्ट रहे हैं.
उन्होंने भारत के खनिज संपदा समृद्ध क्षेत्रों में हड़तालें भी आयोजित करवाई हैं.
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि माओवादी आंदोलन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है.