शुक्रवार, 22 फ़रवरी, 2008 को 10:17 GMT तक के समाचार
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे के उन बयानों पर नाराज़गी ज़ाहिर की है जिनमें उत्तर भारत के लोगों को निशाना बनाया गया था.
राज ठाकरे के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र के कुछ इलाक़ों में हिंसा की घटनाएँ हुई थीं.
मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन जजों की खंडपीठ ने शुक्रवार को कहा, "हम समझते हैं कि वहाँ क्या हो रहा है और हालात कैसे हैं. यह पूरा देश एक है और हम धरतीपुत्र की अवधारणा को स्वीकार नहीं करेंगे."
मुंबई की घटनाओं को लेकर दायर दो जनहित याचिकाओं पर कोर्ट ने इन्हीं शब्दों में अपनी नाख़ुशी ज़ाहिर की.
मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस आरवी रवीन्द्रन और जस्टिस मार्कंडेय काट्जू की इस खंडपीठ ने हालाँकि याचिका पर किसी तरह का निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया.
खंडपीठ ने कहा कि यह मामला प्रारंभिक तौर पर विधि-व्यवस्था से जुड़ा हुआ है इसलिए इसे राज्य सरकार के सामने उठाया जा सकता है.
कोर्ट ने याचिका दायर करने वालों से कहा कि वे मामले को लेकर मुंबई हाईकोर्ट भी जा सकते हैं.
बयान पर विवाद
पुलिस ने इस सिलसिले में राज ठाकरे और समाजवादी पार्टी के सांसद अबु आज़मी को पिछले दिनों गिरफ़्तार भी किया था लेकिन दोनों नेता कुछ देर में ही ज़मानत पर छूट गए थे.
राज ठाकरे ने कुछ दिन पहले कहा था कि बिहार से आए लोग 'छठ का ड्रामा करके मुंबई में अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन' कर रहे हैं.'
इस बयान पर केंद्रीय रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई नेताओं ने तीख़ी प्रतिक्रिया दी थी.
राज ठाकरे के इस बयान के बाद महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर हिंसा भड़क गई थी और उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.
तनाव के दौर में ही राज ठाकरे ने अभिनेता अमिताभ बच्चन पर निशाना साधा और कहा था कि महाराष्ट्र निवासी होने के बावजूद अमिताभ बच्चन उत्तर प्रदेश का ही गुणगान करते रहे हैं.
अमिताभ की आलोचना के बाद समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने भी तीखी बयानबाज़ी की थी.