http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 22 फ़रवरी, 2008 को 15:29 GMT तक के समाचार

नैसकॉम के अध्यक्ष पर मुक़दमा

भारत के एक दक्षिणी शहर बंगलौर में ह्यूलैट-पैकर्ड ग्लोबलसॉफ़्ट कंपनी के प्रबंध निदेशक सोम मित्तल पर अपनी एक कर्मचारी को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मुहैया करा पाने के आरोप में मुक़दमा चलाया जाएगा.

सोम मित्तल पर लगे आरोपों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन कोर्ट ने उस चुनौती को ख़ारिज कर दिया जिसका मतलब है कि सोम मित्तल पर अपनी कंपनी की एक कर्मचारी को समुचित सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहने के आरोप में मुक़दमा चलाया जाएगा.

पुलिस का कहना है कि उस महिला कर्मचारी प्रतिभा श्रीकांत मूर्ति की 2005 में उस समय बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी जब वर रात्रि शिफ़्ट ख़त्म करके अपने घर जा रही थी.

पुलिस के अनुसार प्रतिभा श्रीकांत मूर्ति के साथ उसी कार के ड्राइवर ने पहले तो बलात्कार किया और फिर हत्या कर दी जिसमें बैठकर वह अपने दफ़्तर से घर जा रही थी और वह कार कंपनी की ही थी.

सोम मित्तल फिलहाल भारत में सॉफ़्टवेयर कंपनियों की प्रतिनिधि संस्था नैस्कॉम के अध्यक्ष हैं.

कर्नाटक सरकार ने क़ानून और व्यवस्था के उन प्रावधानों के तहत यह मुक़दमा चलाने का इरादा ज़ाहिर किया था जिसके तहत किसी भी कंपनी की यह ज़िम्मेदारी है कि वह ख़ासतौर से रात में दफ़्तर से घर तक जाने वाली अपनी महिला कर्मचारियों को समुचित सुरक्षा मुहैया कराए.

वारदात के समय सोम मित्तल इस कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) थे और उनके ख़िलाफ़ कर्नाटक के कर्मचारी सुरक्षा क़ानून के उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया था.

इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोम मित्तल के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने का आदेश दिया था जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

29 जनवरी, 2008 को इस मामले में न्यायमूर्ति एचके सीमा और मार्कंडेय काटजू की खंडपीठ ने नैसकॉम अध्यक्ष की याचिका को ख़ारिज करते हुए उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी दे दी थी.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद पुलिस सोम मित्तल के ख़िलाफ़ औपचारिक रूप से एफ़आईआर दर्ज करके मुक़दमा चला सकेगी.

अगर सोम मित्तल को दोषी पाया जाता है तो उन पर एक हज़ार रुपए यानी क़रीब 25 डॉलर का जुर्माना हो सकता है और उनके साथ आपराधिक रिकॉर्ड जुड़ जाएगा.

लेकिन भारत में इस मामले में ज़्यादा दिलचस्पी इसलिए नज़र आई क्योंकि देशभर में लगभघ सात लाख लोग देश-विदेश की कंपनियों के कॉल सेंटरों में काम करते हैं और उनमें लगभग 40 प्रतिशत महिलाएँ हैं.