अफ़ग़ानिस्तान में तैनात सैनिकों के मिशन को लेकर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नैटो के सदस्य देशों के बीच उपजे तनाव के माहौल में संगठन के महासचिव जाप डी हू शेफ़र अफ़गानिस्तान के दौरे पर हैं.
संगठन के कई देश अफ़गानिस्तान के दक्षिणी इलाक़े में अपनी सेनाएँ भेजने से बच रहे हैं क्योंकि दक्षिणी इलाक़ों को बहुत ख़तरनाक माना जाता है.
कनाडा और नीदरलैंड में निकट भविष्य में होने वाले चुनाव में इस मसले से जुड़े और भी सवाल उठने की संभावना है. ये दोनों ही देश दक्षिणी अफ़गानिस्तान में अपने सैनिकों को नहीं भेज रहे हैं.
लेकिन जाप डी हू शेफ़र ने कहा है कि नैटो के मिशन को लेकर उपजे तनाव से संगठन के अस्तित्व पर कोई ख़तरा नहीं है.
वास्तविक समस्या
कनाडा ने यह संदेश पहले ही दे दिया कि यदि कंधार में और अधिक सुरक्षा बल नहीं भेजे गए तो वह अपने सैनिकों को अगले साल वापस बुला लेगा.
ग़ौरतलब है कि पिछले रविवार को कंधार में हुए एक भीषण आत्मघाती हमले में 80 लोगों की मौत हो गई थी.
शेफ़र ने कहा, “मैं कनाडा में होने वाली बहसों को काफ़ी उत्सुकता से देख-सुन रहा हूँ... हम आपात स्थिति के अलावा किन्हीं और हालात में जर्मनी या इटली के सैनिकों से तुरंत यह अपेक्षा नहीं करते कि वे दक्षिण अफ़गानिस्तान जाएँगें.”
उन्होंने कहा कि कुछ देशों को अपने अतिरिक्त सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में भेजने के लिए मनाने की कोशिश की जा रही है.
चुनौतियाँ
अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने हाल ही में कहा कि अगर कुछ ही देश ख़तरनाक जगहों पर अपने सैनिक भेजेगें तो संगठन कुछ ही दिनों में बिखर जाएगा.
इस मसले पर नैटो के महासचिव जाप डी हू शेफ़र ने और चर्चा की आवश्यकता जताई है. उन्होंने ऐसी संभावना से भी इनकार किया कि अफ़गान मिशन पर तनाव से संगठन को किसी तरह का ख़तरा है.
उनका कहना है कि संगठन को कई बार मृत घोषित किया जा चुका है, इसीलिए वो इस बात से चिंतित नहीं हैं.
उन्होंने कहा, "में अफ़ग़ानिस्तान में हार की बात से भी चिंतित नहीं हूँ. हम हार नहीं रहे हैं, चुनौतियाँ बड़ी हैं लेकिन हमने काफ़ी प्रगति की है और काफ़ी कुछ हासिल किया है."
शेफ़र कहते हैं कि सबसे ज़रूरी था कि अफ़गान सैनिक बलों और पुलिस को दिए जाने वाले प्रशिक्षण में सुधार और नैटो सैनिकों को भी बेहतर प्रशिक्षण सुनिश्चित करना.
हाल ही के महीनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का अफ़गानिस्तान में तालेबान विद्रोहियों के मुक़ाबले के साथ-साथ राजनीतिक विकास के लिए दबाव भी बढ़ा है.