मंगलवार, 19 फ़रवरी, 2008 को 15:08 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान की धर्मनिर्पेक्ष कही जाने वाली पार्टी अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के अध्यक्ष अस्फ़ंदयार वली ख़ान का कहना है कि पश्तूनों ने वोट के ज़रिए उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिलाकर विश्व ताक़तों और पाकिस्तान सरकार पर ये ज़ाहिर कर दिया है कि पश्तून अतिवादी और आतंकवादी क़ौम नहीं है.
अस्फ़ंदयार वली ख़ान का कहना था के सूबा सरहद में ज़्यादा सीटें हासिल करने के नाते उनकी पार्टी दूसरी पार्टियों से मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करेगी जबकि केंद्र सरकार में मुद्दों की बुनियाद पर गठबंधन बनाया जाएगा.
सूबा सरहद के ज़िले चारसध में अपने निवास पर बीबीसी से बातचीत करते हुए एएनपी के मुखिया अस्फ़ंदरयार वली ख़ान का कहना था कि प्रांत के पश्तूनों ने उनकी पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिलाकर गेंद विश्व ताक़तों और पाकिस्तानी सरकार के पाले में फेंक कर उन्हें ये प़ैम दिया है कि पश्तून लोग अलगाववादी या अतिवादी क़ौम नहीं है.
उन्होंने कहा, "पश्तूनों ने चुनावी नतीजों से पूरी दुनिया को ये पैग़ाम दिया है कि हमें बंदूक नहीं क़लम, गोलियाँ नहीं किताबें, ख़ुदकुश बमबार के जैकेट्स नहीं बल्कि स्कूल के यूनीफ़ॉर्म चाहिए."
भविष्य में सूबा सरहद और केंद्र में सरकार के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अस्फ़ंदयार वली ख़ान का कहना था कि प्रांतीय एसेम्बली में स्पष्ट बहुमत हासिल होने के बाद उनकी पार्टी एएनपी अन्य पार्टियों से मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करेगी.
हालाँकि वली ख़ान के अनुसार केंद्र में उनकी पार्टी मुद्दों की बुनियाद पर अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करने को प्राथमिकता देगी.
वली ख़ान का कहना था, "पाकिस्तान में पश्तूनों की सरज़मीन पर अमन का क़याम है."
उन्होंने कहा, "प्रांतीय स्वायत्तता हासिल करना, पड़ोसी देशों के साथ भाई चारे की बुनियाद पर संबंध बनाने जैसे मुद्दों पर केंद्र में अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन बनाया जाएगा जबकि हम ये संदेश भी देने की कोशिश करेंगे कि इस मुल्क में कोई आक़ा या ग़ुलाम नहीं बल्कि यहाँ पर चार भाई रहते हैं."
अस्फ़ंदयार वली ख़ान से जब ये पूछा गया कि चुनाव प्रचार के दौरान उनकी प्राटी एएनपी सरकार पर चुनावों में धाँधली के आरोप लगाती रही तो क्या अब भी उनकी पार्टी ये समझती है कि चुनाव में धाँधली हुई है, तो इसके जवाब में अस्फ़ंदयार वली ख़ान का कहना था, "उम्मीदवारों की हद तक ज़रूर धाँधली हुई होगी लेकिन अगर सरकार धाँधली करती तो क्या उसके एक प्रमुख नेता चौधरी शुजाअत हुसैन, शेख़ रशीद और क़ौमी ऐसेम्बली के स्पीकर समेत अन्य मंत्रियों को हार का मुँह देखना पड़ता."