http://www.bbcchindi.com

मंगलवार, 19 फ़रवरी, 2008 को 12:48 GMT तक के समाचार

मुशर्रफ़ विरोधियों ने बाज़ी मारी

पाकिस्तान में दो मुख्य विपक्षी पार्टियों पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पीएमएल (नवाज़) ने मिलकर चुनाव नतीजों में बढ़त हासिल कर ली है.

बेनज़ीर भुट्टो की पीपीपी इस चुनाव में सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी है जबकि नवाज़ शरीफ़ के नेतृत्व वाली पीएमएल (नवाज़) दूसरे नंबर पर है.

वहीं परवेज़ मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पार्टी पीएमएल-क्यू ने हार स्वीकार की है.

नवाज़ शरीफ़ ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होना चाहिए ताकि ‘तानाशाही’ का अंत किया जा सके.

नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि वो बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी पीपीपी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी से मिलेंगे.

नवाज़ शरीफ़ का कहना था, "मैं लोगों की भावना की कद्र करता हूँ. लोगों ने अपना मत ज़ाहिर कर दिया है. लेकिन मुशर्रफ़ को ये बात समझ में नहीं आ रही थी. उन्होंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी. उनका कहना था कि जब लोग चाहेंगे वो चले जाएँगे. आज लोगों ने बता दिया है कि वो क्या चाहते हैं."

चुनाव में बढ़त

पाकिस्तान में 18 फ़रवरी को चुनाव करवाए गए थे और आधिकारिक तौर पर नतीजे मंगलवार तक घोषित नहीं किए जाएँगे.

जीओ टीवी स्टेशन की वेबसाइट के मुताबिक अब तक आए नतीजों के मुताबिक पीपीपी को 86 सीटें मिली हैं और पीएमएल-नवाज़ 64 सीटों पर विजयी रही है.

इसका मतलब है कि पीपीपी और पीएमएल(नवाज़) को कुल मिलाकर 272 सीटों वाले संसद में 150 सीटें मिली हैं.

इन दोनों पार्टियों के समर्थक सड़कों पर जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पीएमएल-क्यू के खाते में अब तक 37 सीटें ही आई हैं.

पीएमएल-क्यू ने नेता शुजात हुसैन ने एपी टेलीवीज़न न्यूज़ से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी खुले दिल से नतीजों को स्वीकार करती है और विपक्षी खेमे में बैठने के लिए तैयार है.

पाकिस्तान सरकार के कई मंत्रियों को हार का मुँह देखना पड़ा है. ख़बरों के अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के शासन के दौरान प्रधानमंत्री रहे चौधरी शुजात हुसैन नेशनल असेंबली का चुनाव हार गए हैं.

मुशर्रफ़ के विश्वस्त और पूर्व मंत्री शेख़ रशीद अहमद रावलपिंडी सीट से हार गए हैं.

वहीं सूबा सरहद में अवामी नेशनल पार्टी को जीत हासिल हुई है और इस्लामिक पार्टियाँ हार गई हैं.

मुशर्रफ़ को ख़तरा

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पहले कहा था कि चुनाव के नतीजे देश की आवाज़ होंगे और जो भी जीतेगा उसे सबको स्वीकार करना होगा.

परवेज़ मुशर्रफ़ स्वयं चुनाव में खड़े नहीं हुए थे लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि उनके समर्थकों की हार के कारण उनकी स्थिति कमज़ोर हुई है.

अगर पीपीपी और पीएमएल(नवाज़) मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं तो संसद में दो-तिहाई बहुमत के साथ वे मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव ला सकते हैं.

सोमवार को हुए चुनाव में हिंसा की कई घटनाएँ हुई थीं और करीब 20 लोगों की मौत हुई थी. पीपीपी ने कहा है कि उसके 15 सदस्य भी मारे गए हैं.

हिंसा की आशंका के चलते आठ करोड़ में ज़्यादातर मतदाता चुनावी प्रकिया से दूर ही रहे और करीब 40 फ़ीसदी से भी कम मतदान हुआ.

ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर 2007 को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे.

मतदान नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ था.

चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार भी पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हुए थे.