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सोमवार, 18 फ़रवरी, 2008 को 03:36 GMT तक के समाचार

पाकिस्तान में हिंसा के बीच धीमा मतदान

पाकिस्तान में हिंसक घटनाओं के बीच नेशनल और प्रांतीय असेंबलियों के लिए धीमी गति से मतदान हो रहा है.

लाहौर में हुई हिंसक घटनाओं में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के उम्मीदवार समेत पांच लोग मारे गए हैं.

मतदान धीमा हो रहा है लेकिन लगातार लोग मतदान केंद्रों पर आ रहे हैं और वोट डाल रहे हैं.

वोट डालने वालों में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और स्वर्गीय बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी भी शामिल हैं.

इससे पहले मतदान के दौरान प्रांतीय असेंबली के लिए पीएमएल (एन) के उम्मीदवार चौधरी आसिफ़ अशरफ़ की गाड़ी को निशाना बनाकर हमला किया गया जिसमें उनकी मौत हो गई. हमले में उनके ड्राइवर और निजी सचिव भी मारे गए.

एक अन्य घटना में लाहौर में ही पीएमएल(एन) के चुनावी दफ़्तर पर अंधाधुंध फ़ायरिंग में एक व्यक्ति मारा गया.

दोपहर तक की सूचना के मुताबिक मतदान की गति तेज नहीं है और मतदाता धीरे-धीरे मतदान केंद्रों पर पहुँच रहे हैं.

इस्लामाबाद स्थित बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी ने बताया है कि
चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

पूरे देश में लगभग 80 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.

संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए मतदान हो रहा है.

मतदान स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे (भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े आठ बजे) शुरू हुआ और शाम पाँच बजे तक चलेगा.

इसके लिए कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और आठ करोड़ नौ लाख मतदाता इनके राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला करेंगे.

देश भर में कुल एक लाख 70 हज़ार मतदान केंद्रों की स्थापना की गई है. पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया है.

पिछले दिनों हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि 35 हज़ार सैनिकों और 47 हज़ार अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है.

पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के चलते इस ऐतिहासिक चुनाव में तनाव और डर का साया साफ नज़र आ रहा है.

मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ भी जताई जा रही हैं.

हालांकि पाकिस्तान के चुनाव आयुक्त क़ाज़ी मोहम्मद फ़ारुक़ ने दोहराया है कि क़ानून व्यवस्था को क़ायम रखते हुए चुनाव बिल्कुल निष्पक्ष कराए जा रहे हैं.

मतदान के पहले हिंसा

शनिवार को क़बायली इलाक़े पारचिनार में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कार्यालय में हुए आत्मघाती हमले में 40 से अधिक लोग मारे गए थे और 90 से अधिक घायल हो गए थे.

रविवार को भी मुस्लिम लीग(नवाज़) के कार्यालय में हमला हुआ और क्वेटा में एमक्यूएम के कार्यालय में भी एक बम विस्फोट हुआ. इन हमलों में कई लोग घायल हुए हैं.

इन चुनाव से पाकिस्तान में सैन्य शासन का अंत हो जाएगा हालाँकि आशंकाएँ जताई जा रही हैं कि इससे अस्थिरता का एक नया दौर शुरू होगा.

इन चुनावों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें भी लगी हुई हैं और चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हैं.

इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी का कहना है कि इन इंतज़ामों के बावजूद लोगों में मन में डर है और दहशत साफ़ दिखती है.

संवाददाताओं का कहना है कि हो सकता है कि इस डर के कारण मतदान करने के लिए कम लोग बाहर निकलें.

आशंकाएँ

ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे.

पाकिस्तान की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने आशंका जताई है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सहयोगी चुनाव में धाँधली कर सकते हैं.

उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर चुनाव में गड़बड़ी हुई तो वो इसका विरोध करेंगे.

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार आगे चल रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने कहा है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होने जा रहे हैं.

पीपीपी का कहना है कि मुशर्रफ़ का समर्थन करने वाली पीएमएल-क्यू फ़र्जी मतदान करने वाली है.

पीपीपी की प्रतिद्वंद्वी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने भी कहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक फ़र्जी मतदान की योजना बना चुके हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि अगर चुनाव साफ़ सुथरे हुए तो तीनों प्रमुख पार्टियों में से किसी को भी बहुमत हासिल होने की संभावना नहीं है और एक त्रिशंकु संसद उभरेगी.