सोमवार, 18 फ़रवरी, 2008 को 23:51 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में नेशनल और प्रांतीय असेंबलियों के लिए हुए चुनाव में वोटों की गिनती जारी है.
उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ घंटों में नतीजे आ सकेंगे.
हालांकि जो रुझान मिले हैं उसमें दिख रहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के कई निकटतम सहयोगी अपनी सीटें हार रहे हैं.
मुशर्रफ़ का समर्थन करने वाली पार्टी के प्रवक्ता ने कहा है कि ऐसा लगता है कि विपक्षी दल अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.
इस बीच विपक्षी दलों के कुछ समर्थक रावलपिंडी और कराची की सड़कों में जश्न मनाने में जुट गए हैं.
सोमवार को शाम बजे मतदान पूरा हुआ था और मतदान के दौरान देश भर के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा की ख़बरे आई थीं.
ग़ैर आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हिंसा में 10 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.
मतदान संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ है.
पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) मु्ख्य राजनीतिक विपक्षी पार्टियाँ हैं.
दिन में मतदान धीमा रहा लेकिन लगातार लोग मतदान केंद्रों पर आते रहे और वोट डालते रहे हैं.
वोट डालने वालों में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़, स्वर्गीय बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ भी शामिल रहे.
परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता के मुताबिक रावलपिंडी में मतदान के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि जो भी चुनाव में जीतेगा उसके साथ मिलकर काम किया जाएगा.
वहीं इस्लामाबाद में वोट डालने वाली एक महिला मतदाता मरिया ज़हूर का कहना था, "मुझे लगता है कि वोट डालना मेरी ज़िम्मेदारी है हालांकि मुझे चुनावी प्रकिया में भरोसा नहीं है. मुझे आशंका है कि इसमें धांधली होगी."
चुनावी हिंसा
मतदान के दौरान प्रांतीय असेंबली के लिए पीएमएल (एन) के उम्मीदवार चौधरी आसिफ़ अशरफ़ की गाड़ी को निशाना बनाकर हमला किया गया जिसमें उनकी मौत हो गई. हमले में उनके ड्राइवर और निजी सचिव भी मारे गए.
एक अन्य घटना में लाहौर में ही पीएमएल(एन) के चुनावी दफ़्तर पर अंधाधुंध फ़ायरिंग में एक व्यक्ति मारा गया.
चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे. पूरे देश में लगभग 80 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था.
मतदान स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे (भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े आठ बजे) शुरू हुआ और शाम पाँच बजे तक चला.
धांधली का आशंका
कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और करीब आठ करोड़ नौ लाख मतदाता वोट डालने के लिए पंजीकृत थे.
पाकिस्तान में कुल एक लाख 70 हज़ार मतदान केंद्रों की स्थापना की गई थी.
पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया.
चुनाव पूर्व हिंसा को देखते हुए देश भर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे. करीब 35 हज़ार सैनिकों और 47 हज़ार अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया था.
पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के चलते इस ऐतिहासिक चुनाव में तनाव और डर का साया मंडराता रहा है.
मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ भी जताई जाती रही हैं. पाकिस्तान की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने आशंका जताई है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सहयोगी चुनाव में धाँधली कर सकते हैं.
ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे.
दुनिया भर की नज़रें इस समय पाकिस्तान पर टिकी हुई हैं. चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे थे.