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रविवार, 17 फ़रवरी, 2008 को 18:24 GMT तक के समाचार

मतदान से पहले डर, तनाव और आशंकाएँ

पाकिस्तान में सोमवार को नेशनल असेंबली यानी संसद के निचले सदन और प्रांतीय असेंबलियों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं.

पिछले दिनों हुई हिंसा की घटनाओं के चलते इस ऐतिहासिक चुनाव के कुछ घंटे पहले तनाव और डर का साया दिख रहा है और मतदान के दौरान धाँधली की आशंकाएँ जताई जा रही हैं.

हालांकि पाकिस्तान के चुनाव आयुक्त क़ाज़ी मोहम्मद फ़ारुक़ ने दोहराया है कि क़ानून व्यवस्था को क़ायम रखते हुए निष्पक्ष चुनाव कराए जाएँगे.

शनिवार को क़बायली इलाक़े पारचिनार में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कार्यालय में हुए आत्मघाती हमले में 40 से अधिक लोग मारे गए थे और 90 से अधिक घायल हो गए थे.

रविवार को भी मुस्लिम लीग(नवाज़) के कार्यालय में हमला हुआ और क्वेटा में एमक्यूएम के कार्यालय में भी एक बम विस्फोट हुआ. इन हमलों में कई लोग घायल हुए हैं.

सोमवार को हो रहे चुनाव से पाकिस्तान में सैन्य शासन का अंत हो जाएगा हालाँकि आशंकाएँ जताई जा रही हैं कि इससे अस्थिरता का एक नया दौर शुरू होगा.

इन चुनावों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें लगी हुई हैं और चुनावों का जायज़ा लेने के लिए दुनिया भर से क़रीब सौ पर्यवेक्षक और पत्रकार पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में पहुँचे हुए हैं.

चुनाव

संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए सोमवार को मतदान होने जा रहा है.

मतदान स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे (भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े आठ बजे) शुरू होगा और शाम पाँच बजे तक चलेगा.

इसके लिए कुल 7, 335 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और आठ करोड़ नौ लाख मतदाता इनके राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला करेंगे.

देश भर में कुल एक लाख 70 हज़ार मतदान केंद्रों की स्थापना की गई है. पाकिस्तान के चुनावी इतिहास में पहली बार मतपेटियों को पारदर्शी बनाया गया है.

पिछले दिनों हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि 35 हज़ार सैनिकों और 47 हज़ार अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है.

इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी का कहना है कि इन इंतज़ामों के बावजूद लोगों में मन में डर है और दहशत साफ़ दिखती है.

संवाददाताओं का कहना है कि हो सकता है कि इस डर के कारण मतदान करने के लिए कम लोग बाहर निकलें.

आशंकाएँ

ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे.

पाकिस्तान की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने आशंका जताई है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सहयोगी चुनाव में धाँधली की योजनाएँ बना रहे हैं.

उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर चुनाव में गड़बड़ी हुई तो वे इसका विरोध करेंगे.

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार आगे चल रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने कहा है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होने जा रहे हैं.

पीपीपी का कहना है कि मुशर्रफ़ का समर्थन करने वाली पीएमएल-क्यू फ़र्जी मतदान करने वाली है.

पीपीपी की प्रतिद्वंद्वी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने भी कहा है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक फ़र्जी मतदान की योजना बना चुके हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि अगर चुनाव साफ़ सुथरे हुए तो तीनों प्रमुख पार्टियों में से किसी को भी बहुमत हासिल होने की संभावना नहीं है और एक त्रिशंकु संसद उभरेगी.