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शनिवार, 16 फ़रवरी, 2008 को 00:16 GMT तक के समाचार

ब्रजेश उपाध्याय
बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

चुनाव देखने तीन अमरीकी सांसद आएँगे

पाकिस्तान में सोमवार को होनेवाले चुनाव का जायज़ा लेने के लिए अमरीका के तीन वरिष्ठ सांसद भी वहां पहुंच रहे हैं और उनका कहना है कि ये बेहद ज़रूरी है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों.

उन्होंने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तानी सरकार भी इस बात को समझ रही है.

ये तीनों सांसद हैं डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके सीनेटर जॉन कैरी, सीनेट में विदेश नीति से जुड़ी समिति के चेयरमैन जो बाइडेन और विदेश नीति के दिग्गज रिपब्लिकन सीनेटर चक हेगेल.

सीनेटर हेगेल का कहना है कि तीन सीनेटर अपने दम पर सही चुनाव करवा लेंगे ऐसा तो मुमकिन नहीं है न ही उनका वो इरादा है.

लेकिन वहाँ उनकी मौजूदगी से पाकिस्तानी जनता को ये संदेश ज़रूर जाएगा कि अमरीका एक ऐसा चुनाव चाहता है जिसमें कोई धांधली न हो, किसी को डराया धमकाया न जाए.

अमरीकी विदेश मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि बहुत ख़राब और बहुत अच्छा के मापदंड पर अगर रखा जाए तो ये चुनाव कहीं बीच में जाकर ठहरेंगे यानी धांधली कुछ हद तक होगी.

उनका कहना है कि पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है.

तो क्या फिर इन सांसदों को भी इस तरह के चुनाव मंज़ूर होंगे?

ये पूछे जाने पर सीनेटर जॉन कैरी का कहना था कि उनकी नज़रों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव वही कहलाएँगे जहां वोटरों को बिना डर वोट डालने को मिले, उन्हें मतदान केंद्रों तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं हो, वोटिंग के बाद बैलट पेपर सही तरीके से रखे जाएँ और उनकी गिनती सही हो.

उनका मानना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो चरमपंथी ताक़तों के हाथ मज़बूत होंगे और पाकिस्तान ही नहीं पूरे इलाक़े की सुरक्षा पर असर पड़ेगा.

सीनेटर जॉन कैरी का कहना था कि बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है और उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तानी हुकूमत ये समझ रही है कि केवल कुर्सी से चिपके रहने की कोशिश से किसी का भला नहीं होगा.

मदद पर असर?

पत्रकारों ने जब ये पूछा कि अगर धाँधली के आरोप लगते हैं तो वो किसका यक़ीन करेंगे, सरकार का या जनता का.

जवाब में रिपबलिकन सीनेटर हेगेल का कहना था कि फ़िलहाल तो वो यही सोचकर जा रहे हैं कि ये चुनाव उनकी उम्मीद के मुताबिक़ होंगे.

उनका कहना था कि अगर उन्होंने देखा कि ऐसा नहीं हुआ है तो फिर उससे जो परिस्थितियां पैदा होंगी, उनसे कैसे निपटा जाए इस पर विचार किया जाएगा.

सीनेटर जो बाइडेन ने कहा है कि अगर चुनाव वैसे नहीं हुए जैसा कि जनता चाहती है तो फिर वो पाकिस्तान को दी जाने वाली फ़ौजी मदद को भी बंद करने के लिए दबाव डालेंगे.

इन सांसदों ने ये भी कहा है कि वो उन्हीं मतदान केंद्रों पर जाएँगे जहां वो जाना चाहते हैं और इसका इंतज़ाम वहां मौजूद उनके अपने अधिकारी कर रहे हैं न कि पाकिस्तानी सकार.

शुक्रवार को ही विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि वो चाहते हैं कि चुनाव ऐसे हों जिस पर जनता यक़ीन कर सके और इससे एक ऐसी सरकार बने जिस पर उनका भरोसा हो.

अमरीका में ये सोच है कि अगर जनता ये समझती है कि चुनाव सही नहीं हुए तो फिर वो सड़कों पर निकल सकती है, ख़ूनख़राबा बढ़ सकता है और अल क़ायदा और तालेबान जैसी ताक़तें इसका फ़ायदा उठाएँगी.

फ़ौज भी आतंकवाद से लड़ने की बजाए क़ानून व्यवस्था बहाल करने में लग जाएगी और ये अमरीका के लिए बुरी ख़बर होगी.