शुक्रवार, 15 फ़रवरी, 2008 को 07:53 GMT तक के समाचार
भारत में बाघों की गिनती विवादों में पड़ गई है. उड़ीसा के अधिकारियों ने हाल ही में हुई बाघों की गिनती को मानने से इनकार कर दिया है.
पिछले दिनों राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट में बाघों की संख्या 1411 बताई गई थी.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उड़ीसा में सिर्फ 37 से 53 बाघ हैं.
लेकिन, अधिकारियों का कहना है कि 2005 में हुई बाघों की गिनती में पूरे राज्य में इनकी संख्या 192 पाई गई थी.
उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी इन ताज़ा आंकड़ों को सही नहीं मानते.
क्या है सच ?
2002 के बाद से ही देश में बाघों की संख्या तेज़ी से गिरी है.
इस दौरान की गई गिनती में देश में 3,642 बाघ पाए गए थे और पिछले छह सालों में ये आधे भी नहीं बचे हैं.
बाघों की गिरती संख्या की एक बड़ी वजह इनका शिकार और शहरीकरण को माना गया है.
उड़ीसा के ही 'सिमलिपाल टाइगर रिज़र्व' की गिनती देश के बड़े बाघ संरक्षण केंद्रों में की जाती है. ताज़ा रिपोर्ट में यहां भी महज़ 20 बाघ ही पाए गए हैं.
इस टाइगर रिज़र्व की देखरेख करने वाले अधिकारियों का कहना है कि 2005 में स्थानीय तरीकों से की गई गिनती में यहां 101 बाघ पाए गए थे.
लेकिन, प्राधिकरण के अधिकारी उड़ीसा सरकार के सभी आरोपों को ग़लत बता रहे हैं.
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के राजेश गोपाल का कहना है कि- "आंकड़े पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर तैयार किये गए हैं जिनमें राज्य के वन अधिकारियों को भी शामिल किया गया था."
उड़ीसा में बाघों के संरक्षण के लिए काम करने वाली एक संस्था के बिश्वजीत मोहंती का कहना है कि, "आंकड़ों को ग़लत बताने की बजाए राज्य सरकार को उन अधिकारियों को सज़ा देनी चाहिए जो बाघों की गिनती के काम में लगे हुए थे"
तमिलनाडु में बढ़ी बाघों की संख्या
मंगलवार को पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि तमिलनाडु ही एक ऐसा राज्य है जहां बाघों की संख्या पहले से ज़्यादा पाई गई है.
पिछले पाँच सालों में यहां बाघों की गिनती साठ से बढ़कर 76 हो गई है.
रोक के बावजूद भारत में बाघों का शिकार बड़े पैमाने पर किया जाता है. बाघों को खाल, हड़्डियों और अंगों के लिए मारा जाता है.
बाघ की खाल से कीमती कपड़े बनाए जाते हैं जबकि, इसकी हड्डियों और अंगों का इस्तेमाल दवा बनाने में होता है.
इनका सबसे बड़ा बाज़ार चीन है जहां इनके लिए साढ़े बारह हज़ार डॉलर तक मिल जाते हैं.
एक रिपोर्ट के मुताबिक सौ साल पहले भारत में 40 हज़ार बाघ हुआ करते थे.
भारत में 17 राज्यों में 23 टाइगर रिज़र्व हैं जिनमें पूरी दुनिया के तकरीबन 40 प्रतिशत बाघ हैं.