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महाराष्ट्र में अर्धसैनिक बल भेजे गए

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे समर्थकों के मंगलवार को उत्पात के बाद केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों को राज्य के लिए रवाना कर दिया गया है.

राज ठाकरे की गिरफ़्तारी की आशंका से उनके समर्थकों ने पुणे और नासिक सहित छह नगरों में हिंसा की जिसमें उत्तर भारतीयों को निशाना बनाया गया और सार्वजनिक परिवहन की बसों पर पथराव किया गया.

समाचार एजेंसियों के अनुसार नासिक में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने कुछ ऐसी दुकानों को निशाना बनाया है जो उत्तर भारत के लोग चलाते हैं.

नासिक पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है. भारी पुलिस तैनाती के बावजूद नासिक के कुछ इलाक़ों में अशांति देखी गई है और शहर में तनाव है.

हालाँकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रवक्ता ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि नासिक में दुकानदारों पर हमले उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किए हैं.

ख़बरें हैं कि इन हमलों के बाद उत्तर भारतीय शहर छोड़ रहे हैं.

पुलिस महानिदेशक पीएस पसरीचा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पथराव की घटनाओं की सूचना औरंगाबाद, लातूर, जालना, बीड़, नासिक और पुणे से मिली है, लेकिन वे सामान्य घटनाएँ हैं.

पसरीचा ने कहा,'' मैं आपको विश्वास दिला सकता हूँ कि मामले को कुछ दिनों में तार्किक अंजाम तक ले जाया जाएगा. ''

गिरफ़्तारी पर असमंजस

हालांकि मुंबई में राज ठाकरे घर के आसपास बड़े पैमाने पर पुलिस बल की तैनाती की गई है.

लेकिन राज्य सरकार अब भी राज ठाकरे की गिरफ़्तारी को लेकर असमंजस में दिखाई दे रही है.

ग़ौरतलब है कि लोगों को भड़काने और वैमन्यस्य फैलाने के लिए राज ठाकरे और समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.

अबू आज़मी मंगलवार को पुलिस के समक्ष पेश हुए लेकिन पुलिस ने फिलहाल उन्हें गिरफ़्तार करने से इनकार कर दिया है.

अबू आज़मी ने पत्रकारों से कहा, " मेरे ख़िलाफ़ मामला दर्ज होने के बाद मैं अपनी गिरफ़्तारी देने की मंशा से पुलिस अधिकारियों से मुलाक़ात करने के लिए पुलिस मुख्यालय गया था. मुझे बताया गया है कि पुलिस अभी मामले की जाँच-पड़ताल कर रही है."

इस बीच केंद्रीय मानव संसाधान मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है राज ठाकरे के कथित भड़काऊ बयानों के बाद उत्तर भारतीय लोगों पर हुए हमलों के मामले में केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए.

अर्जुन सिंह का कहना था, " केंद्र को हस्तक्षेप करना चाहिए. यह क़ानून और व्यवस्था का मामला है. इस तरह की घटनाएँ देश के हित में नहीं हैं."