मंगलवार, 12 फ़रवरी, 2008 को 14:10 GMT तक के समाचार
चार्ल्स हेवीलैण्ड
बीबीसी संवाददाता, काठमांडू
नेपाल के एक युवा पर्वतारोही जलवायु परिवर्तन के भीषण परिणामों की तरफ़ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए माउंट एवरेस्ट की यात्रा करेंगे.
दावा स्टीवन शेरपा नाम के इस पर्वतारोही की उम्र महज़ 23 वर्ष है लेकिन वह इस उम्र में ही एवरेस्ट सहित दुनिया की कई उँची पर्वतमालाओं को लांघ चुके हैं.
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हिमालय पर मौज़ूद ग्लैशियरों को पिघलते हुए देखा तो उनके मन में आया कि क्यों न आम लोगों का ध्यान पर्यावरण के मुद्दों की तरफ़ खींचा जाए.
बेल्जियम और नेपाली मिस्रित मूल के दावा स्टीवन शेरपा का कहना है कि वर्ष 2007 में जब वह पर्वतारोहण कर रहे थे तो 'खुमबु आईस फॉल' के दौरान उन्हें एक डरावना अनुभव हुआ.
वह कहते हैं, "जब मैं ऊपर चढ़ रहा था तो मेरे समूह का एक बड़ा दल वापस अपने साज़ो-सामान के साथ लौट रहा था. हमें सूझ नहीं रहा था कि क्या करें, क्योंकि हमारे पाँव के नीचे जो हिम थे वे पिघल रहे थे. और उसी दिन उस जगह से पूरी हिम नदी पिघल गई."
दावा मानते है कि ग्लोवल वार्मिंग की वजह से ही उस दिन हिम नदी पिघली थी.
पिघलते ग्लेशियर
वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय पर मौजूद सैकड़ों ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन की वजह से पिघल रहे हैं. ये ग्लेशियर पाकिस्तान से लेकर भूटान तक फैले हैं.
इन पिघलते हुए ग्लेशियरों के कारण कुछ नई झील बन गई हैं जिनसे इन घाटियों में बाढ़ आने का ख़तरा बढ़ गया है.
नेपाल स्थित 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटिग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट' ने अनुमान व्यक्त किया है कि वर्ष 2050 तक इस तरह के सारे हिमनद पिघल जाँएगें जिससे इस क्षेत्र में पहले बाढ़ और फिर अकाल आने का ख़तरा बढ़ रहा है.
संस्था के मुताबिक हिमालय से निकलने वाली नदियों कुल मानवता का लगभग पाँचवा हिस्सा निर्भर है.