शनिवार, 09 फ़रवरी, 2008 को 07:19 GMT तक के समाचार
अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि तालेबान नेता मुल्ला उमर और अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन अपने कुछ कमांडरों के साथ पाकिस्तान में छिपे हैं.
वर्ष 2001 में जब अमरीका के नेतृत्व वाली सेनाओं ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया था तब मुल्ला उमर वहाँ तालेबान की सरकार के प्रमुख थे. हमले और सत्ता परिवर्तन के बाद वे वहाँ से ग़ायब हो गए थे और उसके बाद नहीं देखे गए हैं.
अमरीकी अधिकारी ने कहा है कि तालेबान के शीर्ष नेता मुल्ला उमर के साथ क्वेटा शहर में छिपे हैं. क्वेटा अफ़ग़ानिस्तान से सटा हुआ है और अमरीका मानता है कि वहीं से अफ़ग़ानिस्तान में चल रही चरमपंथी हिंसा का नेतृत्व हो रहा है.
ज़ोर देकर कहा गया है कि अमेरिका मानता है कि ओसामा ने पाकिस्तान के पश्चिमी कबायली इलाक़े में कहीं शरण ली हुई है.
हालाँकि पाकिस्तान सरकार इस बात से बार-बार इनकार करती रही है कि मुल्ला उमर या ओसामा उनके देश में हैं.
अमरीकी अधिकारी ने अपना नाम बताए जाने की शर्त पर कहा, "इसमें कोई दो-राय नहीं कि अल क़ायदा के नेता बिन लादेन और अयमान अल ज़वाहिरी पाकिस्तान के कबायली इलाके में हैं."
उन्होंने कहा, "हमारा पक्का यकीन है कि तालेबान की सलाहकार परिषद के नेता मुल्ला उमर पाकिस्तान के क्वेटा में हैं."
बदली रणनीति
इस बीच, अमरीकी सेना ने अपनी रणनीति में बदलाव का संकेत देते हुए कहा है कि भविष्य में वह दुश्मन को जंग के मैदान में मात देने की जगह लोगों के दिल जीतने को अहमियत देगी.
नियमावली तय करने वालों में शामिल जनरल विलियम काडवेल ने बीबीसी को बताया कि सेना का ज़ोर अब दिमागी ताक़त पर रहेगा.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ के अनुभव से सामना आया है कि ऐसे देशों में सैन्य अभियानों में हिस्सा लेने वाले युवा अधिकारियों को अलग कौशल की ज़रूरत होगी.
उन्होंने कहा कि नई नियमावली में विदेशी भाषा सीखने पर भी ज़ोर दिया गया है.
नई नियमावली के इसी महीने के अंत में प्रकाशित होने की संभावना है.