शनिवार, 09 फ़रवरी, 2008 को 12:22 GMT तक के समाचार
नेपाल ने किडनी कांड के प्रमुख अभियुक्त डॉक्टर अमित कुमार को भारत के हवाले कर दिया है. सीबीआई अधिकारियों की निगरानी में डॉक्टर अमित दिल्ली पहुँच गए हैं.
उन्हें पूछताछ के लिए अभी सीबीआई मुख्यालय ले जाया गया है. सीबीआई के अधिकारी डॉक्टर अमित को लाने के लिए नेपाल गए थे.
सीबीआई ने इस मामले में पहले ही एफ़आईआर दर्ज करा दिया है और अब इसकी जाँच भी कर रही है.
नेपाल सरकार ने भारत के अनुरोध के बाद डॉक्टर अमित को सीबीआई के हवाले कर दिया है.
दो दिन पहले डॉक्टर अमित कुमार को नेपाल पुलिस ने बिहार से लगे सीमावर्ती इलाक़े से गिरफ़्तार किया था. शनिवार को भारत ने औपचारिक रूप से पत्र लिखकर डॉक्टर अमित कुमार के प्रत्यर्पण की मांग की थी.
हालाँकि पहले नेपाली अधिकारियों ने कहा था कि डॉक्टर अमित कुमार पर वहाँ की अदालत में मुक़दमा चलाया जाएगा. उसके बाद ही उनके प्रत्यर्पण पर विचार किया जाएगा.
लेकिन बाद में नेपाल में शांति और पुनर्निर्माण कार्यों के मंत्री रामचंद्र पॉडिल ने कहा कि भारत में डॉक्टर अमित कुमार पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उनके प्रत्यर्पण की मांग पर विचार किया जाएगा.
भारत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने भी उम्मीद जताई थी कि नेपाल सरकार जल्द ही डॉक्टर अमित को भारत के हवाले कर देगी.
डॉक्टर अमित कुमार पर ग़ैर क़ानूनी रूप से किडनी प्रत्यारोपण करने का आरोप है. गिरफ़्तारी के समय अमित कुमार के पास से एक लाख 45 हजार डॉलर और 936 यूरो का ड्राफ्ट बरामद हुआ है.
हालाँकि गिरफ़्तारी के बाद अमित कुमार ने अपने को बेगुनाह बताया था.
मामला
जनवरी के आख़िरी सप्ताह में दिल्ली से सटे गुड़गाँव स्थित एक घर पर पुलिस ने छापा मारा था जहाँ से ग़ैर-क़ानूनी तरीके से गुर्दा प्रतिरोपण का धंधा चल रहा था.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ सैकड़ों ग़रीब मज़दूरों को बहला-फुसला कर गुर्दा बेचने के लिए राज़ी किया जाता था. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में कई लोगों को गिरफ़्तार किया था.
लेकिन इस कांड के प्रमुख अभियुक्त डॉक्टर अमित कुमार फरार हो गए थे. बाद में हरियाणा सरकार ने इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने की सिफ़ारिश की थी और डॉक्टर अमित की गिरफ़्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट जारी किया गया था.
मानव अंगों की ख़रीद-फ़रोख़्त पर भारत में क़ानूनी प्रतिबंध है लेकिन फिर भी कई ग़रीब लोग प्रतिरोपण के लिए तैयार ग्राहकों को गुर्दा बेचते रहे हैं. इनमें कई विदेशी ग्राहक भी शामिल हैं.
वहाँ पुलिस ने जब छापा मारा तो पाया कि वहाँ पर ऑपरेशन थिएटर भी बनाया गया था और ऑपरेशन की हर सुविधा मौजूद थी.
आवासीय इलाक़े में बनाए गए उस क्लिनिक में रैकेट चला रहे इन डॉक्टरो ने ग़ाज़ियाबाद, मुरादाबाद और गुड़गांव में अपने कुछ एजेंटों को तैनात किया था और वो लोगो को गुर्दा निकलवाने के लिए तैयार करते थे.
जो लोग अपनी गुर्दा निकलवाने के लिए तैयार हो जाते थे उनमें से अधिकतर ग़रीब तबके के मज़दूर होते थे.
इन मज़दूरों को गुर्दा निकलवाने के लिए 50 हज़ार से लेकर एक लाख रूपए तक दिए जाते थे लेकिन जिन लोगों को किडनी प्रत्यर्पित की जाती थी उनसे 10 लाख से 18 लाख रुपए तक वसूले जाते थे.
पुलिस जाँच में यह भी पता चला कि हरियाणा को केंद्र बनाकर किए जा रहे इस अपराध की जड़ें भारत के कई राज्यों और दुनिया के कई देशों में फैली हुई हैं.