बुधवार, 06 फ़रवरी, 2008 को 13:57 GMT तक के समाचार
विश्व बैंक और ब्रिटेन की एक रिपोर्ट का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के किसानों को आजीविका के लिए अफ़ीम की खेती के स्थान पर किसी और विकल्प पर बढ़ावा देने के लिए अनुकूल प्रयासों और निवेश की ज़रूरत है.
अफ़ग़ानिस्तान के नशीली दवाओं के कारोबार पर जारी एक रिपोर्ट का कहना है कि तालेबानियों को हटाने की मुहिम के बेअसर होने के वक्त से ही नशीली दवा विरोधी नीति लागू की गई है.
विश्व बैंक और ब्रिटेन के विश्व विकास विभाग की एक साझा रिपोर्ट के अनुसार अफ़ीम की खेती अफ़ग़ानिस्तान की प्रमुख आर्थिक गतिविधि है जो वहाँ की बाक़ी अर्थव्यवस्था का एक तिहाई हिस्सा है.
बताया जाता है कि दुनिया का 90 प्रतिशत से अधिक अवैध अफ़ीम का उत्पादन अफ़गानिस्तान में होता है, जिसका उपयोग हेरोइन बनाने के लिए किया जाता है.
लेकिन अफ़ीम की खेती का केंद्र हेलमंद प्रांत में है, जो पिछले काफ़ी सालों से संघर्ष का केंद्र बना हुआ है. इस वजह से वहाँ किसी तरह की प्रगति की संभावना नहीं दिख रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, अफ़ीम की खेती को रोके जाने की उम्मीद बहुत कम है.
पिछले साल की तरह ही देश के आधे प्रांतों में अब भी अफ़ीम की खेती की जा रही है.
असुरक्षा
लेकिन रिपोर्ट कहती है कि फिर भी निराशाजनक संकेत यह हैं कि नशीली दवा का यह कारोबार देश की असुरक्षा से जुड़ता जा रहा है.
इससे वहाँ के क़रीब एक तिहाई हिस्से में प्रभावी विकास कार्यक्रम लागू करने में मुश्किलें आ रही हैं.
रिपोर्ट का कहना है कि इसलिए इस क्षेत्र में और अनुकूल प्रयासों और निवेश करने की ज़रूरत है जो वहाँ की सरकार और दूसरे साझेदारों के लिए बड़ी चुनौती है.
अफ़ग़ानिस्तान में नशा विरोधी नीति लागू करने में ब्रिटेन प्रमुख भूमिका निभा रहा है लेकिन पिछले छह सालों में उसे विफलता ही मिली है.
रिपोर्ट के अनुसार, हेलमंद प्रांत में सफ़लता की उम्मीद के बारे में कोई शक नहीं होना चाहिए जहाँ ब्रिटिश सेना लड़ाई कर रही है.
रिपोर्ट का कहना है कि हेलमंद प्रांत में अफ़ीम की खेती को रोकने के लिए विकल्प विकसित करने के लिए विकास के काम बहुत कम हुए हैं.