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अविनाश दत्त
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

ईमेल के ज़रिए सीटू को ठगा

आपको ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जो ईमेल ठगी के शिकार हुए होंगे. पर अब आम आदमी ही नहीं बड़े रसूख़दार लोग भी इस तरह के ईमेल ठगी के शिकार हो रहे हैं.

हाल ही में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के ताकतवर कर्मचारी संगठन सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियन यानि सीटू इस तरह की धोखाधड़ी की शिकार हुआ है.

इसके पहले एक संसद के भाई भी अपने लाखों रुपये गँवा बैठे हैं.

दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में सीटू को लंदन से एक ईमेल आया. इसमे सीटू को लंदन में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में आमंत्रित किया गया.

यह आमंत्रण अन्तरराष्ट्रीय विकास संस्थान (आईडीओ) की तरफ से था.

यह सम्मेलन 22 से 25 फ़रवरी के बीच लंदन में आयोजित होना बताया गया था. सीटू से कहा गया कि आयोजक आने जाने का ख़र्चा देंगें और सीटू को होटल का ख़र्चा उठाना होगा.

बताए अनुसार सीटू ने 17 जनवरी को चौबीस हज़ार रुपए का भुगतान कर दिया. चार दिन बाद फिर आयोजकों ने पैसे मांगे तो सीटू को शक हुआ.

सीटू के अध्यक्ष एमके पंधे ने बताया की दोबारा पैसा मांगने पर उन्होंने लंदन मैं अपने ट्रेड यूनियन के साथियों को बताए पते पर भेजा तो पता लगा की ईमेल मैं दी गई सारी जानकारी ग़लत है.

उनका कहना था, " न बताए पते पर होटल था, न दिए गए फ़ोन नंबर काम कर रहे थे, कुल मिला कर सब झूठ था.” सीटू की तरफ़ से लंदन पुलिस के पास भी एक शिकायत दर्ज कराई गई है.

जाँच का अनुरोध

पंधे ने विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है की अपराधियों को पकड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग लिया जाए ताकि और लोग बच सकें.

ठगे जाने वाले रसूखदार लोगों में पंधे या उनका संगठन पहला मामला नहीं है.

दिसंबर माह में ही जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और राष्ट्रीय लोक दल से राज्यसभा सदस्य महमूद मदनी के छोटे भाई मौऊद मदनी को ईमेल आया कि उन्हें साढ़े दस करोड़ की लाटरी लगी है. ईमेल भेजने वालों ने उनसे भी पैसे मांगे.

मदनी ने पैसे दे भी दिए पर बाद और जब ज़्यादा पैसे मांगे गए तो उन्हें शक हुआ, तब उन्होंने पुलिस की मदद ली.

मदनी का कहना है कि उन्होंने पुलिस के बताए अनुसार अपराधियों को उलझाए रखा और पुलिस तीन अपराधियों को पकड़ने में कामयाब हो गई. हालांकि पूछे जाने पर मदनी कहते हैं कि उन्हें अधिक नुक़सान नहीं हुआ.

पर दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ इस्टेट पुलिस थाने के अधिकारी नरेश खनका के अनुसार मदनी ने 14 लाख रुपए दिए थे जो वापस नहीं मिले.