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शुक्रवार, 01 फ़रवरी, 2008 को 01:33 GMT तक के समाचार

'सेतुसमुद्रम योजना सुरक्षा के लिए ख़तरा'

भारतीय तटरक्षक बल के मुख्य वायस एडमिरल आरएफ़ कॉंट्रैक्टर ने कहा है कि विवादास्पद सेतुसमुद्रम योजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बन सकती है.

उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार हफ़्ते के भीतर इस परियोजना पर संशोधित हलफ़नामा देने के लिए कहा है.

जब एडमिरल कॉंट्रैक्टर से पत्रकारों ने समुद्री रास्ते से चरमपंथी ख़तरे के बारे में पूछा तो उनका कहना था, "सेतुसमुद्रम जैसी योजनाएँ सुरक्षा की समस्या को और बढ़ा सकती है. छोटा समुद्री रास्ता सुरक्षा के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है."

इस सवाल पर कि क्या तटरक्षक बल ने सरकार को इस ख़तरे से आगाह कराया है, उन्होंने कहा कि जब परियोजना को हरी झंडी दी गई थी तब नौसेना और उनसे अपनी-अपनी राय देने को कहा गया था.

ख़तरा

आरएफ़ कॉंट्रैक्टर ने कहा कि जब यह परियोजना पूरी हो जाएगी तब सुरक्षा के पर्याप्त क़दम उठाए जाएंगे.

कांट्रैक्टर का कहना था कि इस परियोजना से सुरक्षा के कई मुद्दे जुड़े हैं और पड़ोसी देश की सीमा के यह बहुत नज़दीक है जो समस्याओं का सामना कर रहा है.

उन्होंने कहा कि सेतुसमुद्रम का रास्ता भी बहुत संकरा है और किसी पोत के वहां फंसने से पेचीदगियां पैदा हो सकती हैं.

वायस एडमिरल कॉंट्रैक्टर ने कहा कि अगर समुद्र का यह रास्ता मुक्त रूप से खोल दिया गया तो समुद्री तस्करी और आतंकवाद समेत तमाम तरह के समुद्री ख़तरों से जुडे़ मुद्दों से भी निपटना होगा.

मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और हिंदूवादी संगठन इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं.

इनका मानना है कि भारत और श्रीलंका के बीच भगवान राम ने सेतु बनवाया था और जहाजों की आवाजाही के लिए इसे तोड़ने की योजना से हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं.

यह विवाद तब और बढ़ गया था जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के हलफ़नामे में कहा गया कि रामायण और इसके पात्र मिथक हैं जिनका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है.

हिंदूवादी संगठनों के साथ-साथ केंद्र सरकार को समर्थन दे रहे वाम दलों ने भी इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया जिसके बाद विवादास्पद हलफ़नामे को वापस लेने का फ़ैसला हुआ.