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बुधवार, 30 जनवरी, 2008 को 12:08 GMT तक के समाचार

महात्मा गांधी की अस्थियाँ विसर्जित

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की अस्थियों का एक कलश बुधवार को उनकी 60वीं पुण्यतिथि पर अरब सागर में विसर्जित किया गया.

विसर्जन मुंबई में किया गया. बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों की मौजदगी में उनकी अस्थियाँ उनकी पौत्री नीलम पारिख ने अरब सागर में प्रवाहित कर दीं.

नीलम पारिख गांधी जी के पुत्र हरिलाल की बेटी हैं, गांधी जी के रिश्ते अपने बेटे हरिलाल से काफ़ी बिगड़ गए थे और हरिलाल गांधीजी के अंतिम संस्कार में भी नहीं पहुँचे थे.

नीलम पारिख से अस्थि विसर्जन कराके महात्मा गांधी के वारिसों ने पिता-पुत्र के बीच की कड़वाहट को पीछे छोड़ देने की एक कोशिश की है.

बुधवार को विसर्जन के मौके पर महात्मा गांधी के परिवार के कई सदस्य, केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल, राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी, कई गांधीवादी, छात्र, पर्यटक और आम लोग इकट्ठा हुए.

पहले बापू के अस्थिकलश पर लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए. उन्हें याद किया गया. सैनिकों ने सलामी दी और उसके बाद अस्थियों को विसर्जन के लिए ले जाया गया.

महात्मा गांधी की 60 वर्ष पहले 30 जनवरी, 1948 को दिल्ली में हत्या कर दी गई थी जिसके बाद उनकी अस्थियों को देश के अलग-अलग हिस्सों में विसर्जित भी कर दिया गया था.

हालांकि कुछ अस्थिकलश ऐसे भी थे जो उस वक्त विसर्जित नहीं हो सके. ऐसा ही एक कलश पिछले दिनों एक औद्योगिक परिवार के पास से मिला है.

पिछले दिनों एक औद्योगिक परिवार ने मुंबई स्थित मणिभवन को एक कलश देते हुए बताया कि इसमें महात्मा गांधी की अस्थियाँ हैं और यह कलश वर्ष 1948 से ही उनके पास रखा हुआ है.

'विसर्जन ही उचित'

मणिभवन ट्रस्ट की मंशा थी कि इस कलश को लोगों के दर्शन के लिए बापू की एक संग्रहणीय सामग्री के तौर पर सुरक्षित रखा जाए पर बापू के परिजन इससे सहमत नहीं है.

महात्मा गांधी के परिवार की चार पीढ़ियों के सदस्यों का तर्क है कि बापू नहीं चाहते थे कि उनकी अस्थियों को रखा जाए. वो चाहते थे इन्हें विसर्जित कर दिया जाए.

परिवार का कहना है कि धर्म के मुताबिक भी यही सही होगा कि उन्हें विसर्जित कर दें.

पिछले कुछ दिनों से यह अस्थिकलश मणिभवन में लोगों के दर्शन के लिए रखा था. इस दौरान बड़ी तादाद में लोग बापू के अवशेषों को देखने आए.

माना जा रहा है कि यह अस्थिकलश बापू का अंतिम बचा अवशेष होगा.