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बुधवार, 30 जनवरी, 2008 को 13:58 GMT तक के समाचार

'अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति चिंताजनक'

अमरीका के कूटनीतिज्ञों और अमरीकी सेना के अधिकारियों के एक दल ने कहा है कि अगर अफ़ग़ानिस्तान की स्थितियों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो वहाँ हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे.

दल ने अपने एक अध्ययन में अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध की स्थिति को भुलाने और उसकी अनदेखी होने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है.

साथ ही कहा है कि अगर वहाँ की बिगड़ती स्थितियों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो अफ़ग़ानिस्तान एक अक्षम राज्य बन जाएगा.

बुधवार को दिन में इस पूरे अध्ययन की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा पर उससे पहले ही रिपोर्ट के कुछ अहम तथ्यों पर ख़बरें आना शुरू हो गई हैं.

समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक यह रिपोर्ट अफ़ग़ानिस्तान में और अधिक तादाद में नैटो सेना की तैनाती की पैरवी करती है.

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि अमरीका को चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान पर अपनी नीति को वो इराक़ से अलग करके रखे और देखे.

रिपोर्ट अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक विशेष अमरीकी राजदूत की नियुक्ति की भी वकालत करती है.

चिंताजनक स्थिति

अफ़ग़ानिस्तान की ताज़ा स्थिति का अध्ययन करने का जिम्मा दो वरिष्ठ अमरीकी अधिकारियों के नेतृत्व वाले एक दल को सौंपा गया था.

दल का नेतृत्व कर रहे संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजदूत थॉमस पिकरिंग और अमरीकी जनरल जेम्स जॉन्स ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि अफ़ग़ानिस्तान पर अलग से ध्यान दिया जाए ताकि उसे और विकट स्थितियों में जाने से बचाया जा सके.

ग़ौरतलब है कि पिछले दो वर्षों के दौरान तालेबान ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने वर्चस्व को प्रभावी बनाने के लिए फिर से संघर्ष को ज़ोर दिया है.

इस दौरान लगातार दोनों ओर से हमले किए जा रहे हैं और अफ़ग़ानिस्तान में कई क्षेत्र युद्ध के मैदान बने हुए हैं.

सबसे ज़्यादा चिंताजनक स्थिति है देश के दक्षिणी इलाकों की जहाँ अमरीकी नेतृत्ववाली नैटो सेना को तालेबान या तालेबान समर्थक चरमपंथियों से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.