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शनिवार, 26 जनवरी, 2008 को 15:59 GMT तक के समाचार

गुर्दा चोरी रैकेट में चार गिरफ़्तार

भारत में पुलिस का कहना है कि हरियाणा के गुड़गांव और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद सहित अनेक शहरों में गुर्दा चोरी का रैकेट चलाने के संदिग्ध कई डॉक्टरों में से एक डॉक्टर उपेन्द्र कुमार को गुड़गांव से गिरफ़्तार किया गया है.

गुड़गांव के पुलिस आयुक्त मोहिंदर लाल के अनुसार इस रैकेट में चार डॉक्टर शामिल थे जिनके नाम डॉक्टर उपेन्द्र कुमार, डॉ जीवंत कुमार, डॉ अमित कुमार और डॉ शरद कुमार हैं.

गिरफ़्तार किए गए डॉक्टर उपेन्द्र कुमार बल्लभगढ़ में श्रीराम अस्पताल चलाते हैं. इसके अलावा उनके तीन साथियों को गिरफ़्तार किया गया है और अन्य लोगो की तलाश की जा रही है.

पुलिस के अनुसार गिरफ़्तार डॉक्टर उपेन्द्र ने स्वीकार कर लिया है कि वो कई सालों से इस धंधे में लिप्त है.

उत्तर प्रदेश पुलिस को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए गुड़गांव जा रहे थे.

गुड़गांव में जिस स्थान पर इन लोगो के पहुंचने की सूचना मिली थी वहाँ पुलिस ने जब छापा मारा तो पाया कि वहाँ पर ऑपरेशन थिएटर भी बनाया गया था और ऑपरेशन की हर सुविधा मौजूद थी.

आवासीय इलाक़े में बनाए गए उस क्लिनिक में रैकेट चला रहे इन डॉक्टरो ने ग़ाज़ियाबाद, मुरादाबाद और गुड़गांव में अपने कुछ एजेंटों को तैनात किया था और वो लोगो को गुर्दा निकलवाने के लिए तैयार करते थे.

जो लोग अपनी गुर्दा निकलवाने के लिए तैयार हो जाते थे उनमें से अधिकतर ग़रीब तबके के मज़दूर होते थे.

इन मज़दूरों को गुर्दा निकलवाने के लिए 50 हज़ार से लेकर एक लाख रूपए तक दिए जाते थे लेकिन जिन लोगों को किडनी प्रत्यर्पित की जाती थी उनसे 10 लाख से 18 लाख रुपए तक वसूले जाते थे.

पुलिस आयुक्त मोहिंदर लाल का कहना है कि इस गोरखधंधे को पिछले आठ-नौ साल से अंजाम दिया जा रहा था.

गिरफ़्तार लोगों के पास से कुछ दस्तावेज़ बरामद हुए हैं जिनसे पता चलता है कि इन डॉक्टरों से अरब देशों से भी लोग गुर्दा प्रत्यर्पण का अनुरोध कर रहे थे.

साथ ही गुड़गांव में जिस रेस्ट हाउस पर छापा मारा गया था वहां एक प्रवासी भारतीय यानी एनआरआई और ग्रीस से आया एक व्यक्ति भी मौजूद था.

हालांकि अभी मामले की जांच चल रही है लेकिन पुलिस को आशंका है कि ये दोनो व्यक्ति गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए यहां पर आए थे.