शुक्रवार, 25 जनवरी, 2008 को 08:14 GMT तक के समाचार
भारत के सरकारी बैंको के कर्मचारी शुक्रवार को एक दिन की हड़ताल पर चले गए हैं. बैंक कर्मचारी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और उसके सहायक बैंको के प्रस्तावित विलय का विरोध कर रहें हैं.
समाचार एजेंसियों के अनुसार बैंक संगठनो का मानना है कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और उसके सहायक बैंको के प्रस्तावित विलय से बैंकिंग सैक्टर के कामकाज पर बुरा असर पड़ेगा.
बैंक कर्मचारियों के सर्वोच्च संगठन यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियन्स (यूएफ़बीयू) ने दावा किया है कि अपनी मांगो के समर्थन में बैंक के देश भर के 10 लाख से ज़्यादा कर्मचारी और वरिष्ठ अधिकारी हड़ताल पर हैं.
यूएफ़बीयू में देश भर के नौ संगठन शामिल हैं.
यूएफ़बीयू के महासचिव वीके गुप्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि देश भर में विभिन्न बैंको की 50 हज़ार से ज़्यादा शाखाओं में दैनिक कामकाज प्रभावित हुआ है.
इससे पहले विलय के मुद्दे पर श्रमिक आयोग, एसबीआई प्रबंधन और बैंक संगठनो के बीच हुई बैठक का कोई नतीजा नहीं निकल पाया था.
बातचीत बेनतीजा
गतिरोध समाप्त करने के लिए बैंक यूनियन ने एसबीआई के चेयरमैन ओपी भट्ट से सोमवार को मुलाक़ात की थी लेकिन दोनो पक्षो के बीच वार्ता बेनतीजा रही.
ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ़िसर्स फ़ेडरेशन के महासचिव जीडी नदाफ़ का कहना है कि कई मुद्दें ऐसे थे जिन पर बैंक प्रबंधन का रूख़ कड़ा था और इसमें विलय का मुद्दा भी शामिल था इसलिए हमने शुक्रवार को हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया.
यूनियन के अनुसार हड़ताल से प्रभावित होने वाले बैंको में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल है.
बैंक यूनियनों ने 25 फ़रवरी से दो दिन की हड़ताल पर जाने की भी धमकी दी है और कहा है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो मार्च के आख़िरी सप्ताह में वो अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर जा सकतें हैं.
विलय का विरोध कर रहे बैंक यूनियनो की मांगो में कर्मचारियों की नियुक्ति, पेंशन योजना, सहायता के तौर पर कर्मचारी के परिजनो को मिलने वाली नौकरी और वेतन में सुधार जैसी मांगे शामिल है.