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बुधवार, 23 जनवरी, 2008 को 17:56 GMT तक के समाचार

अफ़ग़ान पत्रकार को मौत की सज़ा

अफ़ग़ानिस्तान में एक पत्रकार को ईश-निंदा करने वाली सामग्री बाँटने के आरोप में अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई है.

23 वर्षीय सईद परवेज़ कमबख़्श ने इंटरनेट से कुछ सामग्री डाउनलोड की थी जिसमें इस्लामिक समाज में महिलाओं की भूमिका के बारे में लिखा गया था.

फिर ये आरोप लगाया गया है कि ये सामग्री इस्लाम का अपमान करती है. उसके बाद सईद परवेज़ को अक्तूबर 2007 में गिरफ़्तार कर लिया गया था.

बल्ख़ प्रांत की एक अदालत ने कहा है कि कमबख़्श ने ईश-निंदा की बात स्वीकार कर ली है और उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए.

अदालत ने ये भी चेतावनी दी कि अगर कोई पत्रकार कमबख़्श को दी गई सज़ा का विरोध करेगा तो उसे गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.

फ़ैसले का विरोध

परवेज़ कमबख़्श बल्ख यूनिवर्सिटी के छात्र हैं और जहान-ए-नॉ नाम के अख़बार में बतौर पत्रकार काम करते हैं.

अदालत के एक अधिकारी ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि इस्लामिक क़ानून के तहत सईद परवेज़ को मौत की सज़ा सुनाई गई है. लेकिन अंतिम फ़ैसले से पहले उन्हें अभी तीन और अदालतों से गुज़रना होगा.

हालांकि बल्ख़ प्रांत के उप एटॉर्नी जनरल हफ़ीज़ुल्ला ख़लीक़यार ने आगाह किया है कि परवेज़ का समर्थन करने वाले पत्रकारों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा लेकिन एएफ़पी के मुताबिक पत्रकार परवेज़ के घर के बाहर इकट्ठा हुए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के कई मौलवियों ने सईद परवेज़ की मिली सज़ा का स्वागत किया है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना की है.

मीडिया वॉचडॉग समूह 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' ने अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई से अपील की है कि वो हस्तक्षेप करें इससे पहले की बहुत देर हो जाए.

समूह ने अपने बयान में कहा है, "ये मुक़दमा जल्दीबाज़ी में हुआ, स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति को तरजीह नहीं दी गई. "

रॉयटर्स के मुताबिक सईद परवेज़ के भाई सईद याक़ूब इब्राहिमी का कहना है कि अदालत का फ़ैसला 'निष्पक्ष' नहीं है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है.