बुधवार, 16 जनवरी, 2008 को 11:13 GMT तक के समाचार
चार्ल्स हेविलैंड
बीबीसी संवाददाता, काठमांडू
नेपाल की मृतप्राय भाषा दुरा बोलने-बरतने वाली एक मात्र 82 वर्षीय महिला सोमा देवी दुरा का स्वास्थ्य बिगड़ जाने के साथ ही यह चिंता जागी है कि अगर उन्हें कुछ हो जाता है तो इस भाषा का क्या होगा क्योंकि उनके अलावा इस भाषा को इस्तेमाल करने वाला और कोई नहीं है.
इन्हीं चिंताओं के तहत सोमा देवी दुरा को स्वास्थ्य सुविधाएँ देने की योजनाएँ बनाई जा रही है.
सोमा देवी दुरा के परिवार के अन्य सदस्य भी इस भाषा का इस्तेमाल आपसी बोल-चाल के लिए नहीं करते हैं.
अगस्त 2007 में दुरा भाषा बोलने वाली एक अन्य महिला की मौत हो गई थी और उसके बाद सोमा देवी दुरा ही ऐसी एकमात्र व्यक्ति बची हैं जो दुरा भाषा जानती, समझती और बोलती हैं.
पश्चिमी नेपाल की पहाड़ियों में सोमा देवी का घर है जहाँ इस समय वे बीमार हैं. उनके देखने-सुनने की शक्ति काफ़ी क्षीण हो चुकी है.
सोमा देवी के पास दुरा भाषा में गाए जाने वाली गीतों और लोक कथाओं का खज़ाना है.
दुरा भाषा तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार के अंतर्गत आती है. सोमा देवी अपने पति और बच्चों से अन्य भाषाओं में बातचीत करती हैं क्योंकि उनके परिवार में इस भाषा को कोई भी अब बोलता नहीं है लेकिन नेपाल के कुछ शोधार्थी इस भाषा को बचाए रखने की काफ़ी कोशिश कर रहे हैं.
ऐसे ही एक शोधार्थी केदार नगिला बचपन में दुरा समुदाय के बच्चों के साथ खेल-कूद करते थे. उन्होंने इस भाषा के तक़रीबन एक हज़ार 500 सौ शब्दों और ढाई सौ वाक्यों को संग्रहित किया है.
वे सोमा देवी को इलाज के लिए काठमांडू के अस्पताल में दाख़िला करवाना चाहते है. वे चाहते हैं कि दुरा समुदाय के बच्चे इस भाषा को सीखें जो वे भूल चुके हैं.
उल्लेखनीय है कि नेपाल में सौ से ज़्यादा ऐसी भाषाएँ हैं जिनको बोलने-बरतने वाले सौ से भी कम लोग बचे हैं.
भाषा वैज्ञानिक माधव प्रसाद पोखरेल कहते हैं जिस तरह से हिब्रू भाषा को फिर से जीवित किया गया है इससे वे उत्साहित हैं लेकिन वे मानते हैं कि नेपाल की इन छोटी भाषाओं को फिर से जीवित करना मुश्किल है.