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शनिवार, 12 जनवरी, 2008 को 12:08 GMT तक के समाचार

एस नियाज़ी
भोपाल से

बढ़ रहा है किराए की कोख का चलन

किराए की कोख और अच्छे इलाज की सुविधा के चलते इंदौर और भोपाल जैसे छोटे शहर अब निसंतान दंपतियों के लिए उम्मीदों के नए ठिकाने बन गए हैं.

भोपाल निवासी राजेश और ऊषा शादी के कई साल बाद भी संतान नहीं होने से परेशान थे.

दो साल पहले उन्होंने इंदौर का रुख़ किया और डॉ दिनेश जैन और डॉ शेफ़ाली जैन के असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलाजी (एआरटी) सेंटर पहुंचे.

डॉ शैफ़ाली जैन कहती हैं, “ऊषा बच्चा चाहती थी, लेकिन उनका कई बार गर्भपात हो चुका था. पहले तो उन्हें सरोगेट मदर का विचार पसंद नही आया. मगर जब इस काम के लिए उनकी एक रिश्तेदार आगे आईं तो वो तैयार हो गईं.”

बदले हालात

भोपाल के इस दंपति को दो साल पहले महज़ डेढ़ लाख में संतान सुख प्राप्त हुआ है.

मगर अब हालात बदल गए हैं. चाहे इंदौर हो या भोपाल अब यहां पर विदेशों से संतान प्राप्त करने वालों की एक बड़ी तादाद देखी जा सकती है.

इंदौर और भोपाल में बड़ी तादाद में निसंतान दंपति संतान सुख के लिए विभिन्न एआरटी सेंटरों में पहुंच रहे हैं.

भोपाल स्थित टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में इस वक़्त अमरिका, एशिया और इंग्लैंड की महिलाओं ने बकायदा रजिस्ट्रेशन करवा रखा है.

रूस की 37 वर्षीय निसंतान महिला रुपये बचाने के लिए भोपाल से सरोगेट मदर चाह रही हैं.

रूस में सरोगेट मदर चाहने वालों को दस से बीस लाख तक ख़र्च करना पड़ता है. जबकि यहां दो लाख रुपये तक में ही सरोगेट मदर मिल सकती हैं.

भोपाल टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के संचालक डॉ रणधीर सिंह कहते है, “इंटरनेट और अन्य माध्यमों से विदेशों में रहने वाली इन महिलाओं को भोपाल में सरोगेट मदर की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने हमसे संपर्क किया. विदेशों में सरोगेट मदर मुश्किल से मिलती है, इसलिए उन्होंने यहां रुचि दिखाई है.”

चिकित्सकों का कहना है कि वो हर किसी महिला के लिए सरोगेट मदर का इंतज़ाम नहीं करते.

डॉ दिनेश जैन कहते है, “ हम पहले ये पता लगाते है कि वो महिला क्या वाकई मां बनने के काबिल नहीं है. इसके बाद ही हम उसके लिए सरोगेट मदर का इंतज़ाम करते है.”

बढ़ती तादाद

वैसे भोपाल और इंदौर में ऐसी महिलाओं की तादाद अब काफ़ी बढ़ रही है जो सरोगेट मदर बनना चाहती है. जब भी इसके लिए विज्ञापन निकाला गया, अच्छी ख़ासी तादाद में महिलाओं ने कोख किराए पर देने की इच्छा दिखाई.

ऐसा नही है कि ये महिलाएं सिर्फ़ ग़रीब परिवारों से ही ताल्लुक रखती है. भोपाल जैसे शहर में एक चार्टर्ड एकाउंटेंट की पत्नी और एक बीमा एजेंट की पत्नी ने भी सरोगेट मदर बनने की इच्छा जताई है और वो भी पैसों के लिए.

इनमें से एक का कहना है कि उनके पति ने मकान के लिए 25 लाख का कर्ज़ लिया है, इसे आसानी से चुकाने के लिए वो ये रास्ता चुन रही है. उनके पति को भी इससे ऐतराज़ नहीं है.

लेकिन ये भी सच है कि ये महिलाएँ नहीं चाहती कि उनके इस काम का पता किसी और को चले. उन्हें डर है कि उनके इस काम को समाज अच्छा नही मानेगा.