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शुक्रवार, 11 जनवरी, 2008 को 11:53 GMT तक के समाचार

बैलों के खेल 'जल्लीकट्टू' पर पाबंदी

भारत के उच्चतम न्यायालय ने दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में बैलों के लोकप्रिय खेल ‘जल्लीकट्टू’ पर प्रतिबंध लगा दिया है.

इस खेल का आयोजन मंदिरों के शहर मदुरै के निकट दो गाँवों में फसलों की कटाई के वार्षिक त्योहार ‘पोंगल’ के दौरान होता है.

इसमे बैलों के सींगों पर कीमती वस्तुएँ और उपहार बाँधकर उन्हें एक-एक कर खुले मैदान में छोड़ दिया जाता है और फिर स्थानीय लोग इन वस्तुओं और उपहारों को पाने के लिए बैलों के साथ जूझते हैं.

पिछले कुछ समय में यह खेल काफ़ी ख़तरनाक हो गया है और प्रत्येक वर्ष इसमें बहुत से लोग घायल होते हैं और कुछ मारे भी जाते हैं.

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा, “जानवरों के साथ निर्दयता की किसी भी घटना की अनुमति नहीं दी जा सकती.”

स्पेन की लोकप्रिय सांड लड़ाई और तमिलनाडु के इस खेल के बीच प्रमुख अंतर ये है कि 'जल्लीकट्टू' में बैलों को जानबूझकर नहीं मारा जाता.

ख़तरनाक खेल

ये खेल किसी स्टेडियम में नहीं होता इसलिए इसमें भाग लेने वाले और दर्शक अक्सर घायल हो जाते हैं.

वर्ष 2007 में इस खेल के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 2005 में तो पाँच लोग मारे गए थे और 200 से अधिक घायल हुए थे.

प्रशासन का कहना है कि प्रत्येक वर्ष नए सुरक्षा उपाय अपनाने के बावजूद इस खेल में घायल होने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है.

दूसरी ओर आयोजक कहते हैं कि ये एक पवित्र भारतीय परंपरा है जिसका उल्लेख प्राचीन धार्मिक पुस्तकों में किया गया है.

उनका कहना है कि ये खेल 2000 वर्ष से भी अधिक पुराना है और तमिल संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी.