शुक्रवार, 11 जनवरी, 2008 को 19:40 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि भारत और चीन को अपने सीमा विवादों को जल्दी सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए और इन मतभेदों का असर बेहतर होते द्विपक्षीय संबंधों पर नहीं पड़ने देना चाहिए.
प्रधानमंत्री ने शिन्हुआ संवाद समिति को दिए एक इंटरव्यू में कहा ' मैं खुले दिमाग से चीन जा रहा हूं ताकि वहां आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा कर सकूं और दोनों देशों के भविष्य के लिए एक ऐसे संबंध की स्थापना कर सकूं जो सबके लिए फायदेमंद हो. '
प्रधानमंत्री 12 जनवरी से चीन की यात्रा पर जा रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने अपनी इस यात्रा को दोनों देशों के बीच हाल में उच्च स्तर पर बढ़ते संबंधों की कड़ी बताया और कहा कि ' भारत और चीन के संबंध अब द्विपक्षीय सीमाओं को पार कर के वैश्विक और सामरिक महत्व का रुप ले चुके हैं. '
सीमा विवाद के बारे में उनका कहना था कि दोनों देशों के अधिकारी इस मुद्दे पर बातचीत में लगे हैं और जल्दी ही एक ऐसा ढांचा तैयार कर लिया जाएगा जिसके तहत दोनों देशों की सभी सीमाओं से जुड़े विवादों का निपटारा हो सकेगा.
विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की चीन रवानगी से पहले आयोजित प्रेस कांफ्रेस में दोनों देशों के बढ़ते आर्थिक संबंधों का जिक्र किया.
विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा कि इस समय भारत से चीन को निर्यात काफी कम है और भारत चाहता है कि निर्यात बढ़े.
उल्लेखनीय है कि इस दिशा में दोनों देशों ने मिलकर स्टडी ग्रुप बनाया है जो इस पर चर्चा कर रहा है.
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के अलावा पर्यटन, प्रतिरक्षा, जल संसाधन और पाकिस्तान के मुद्दों पर चर्चा हो सकती है जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बातचीत की संभावना भी है.
प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी पहली चीन यात्रा में प्रधानमंत्री की चीन के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक होगी और संभावना है कि भारत-अमरीका परमाणु सौदे को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हो.
हालांकि शिवशंकर मेनन का कहना था कि इस मुद्दे पर चीन से बातचीत तभी होगी जब भारत और अमरीका के बीच परमाणु सौदा हो जाएगा और इसके लिए न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप से अनुमति लेनी होगी.