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गुरुवार, 10 जनवरी, 2008 को 14:53 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता,जयपुर

पूर्व पुलिस महानिदेशक समर्पण

भारत के उड़ीसा राज्य के निलंबित पुलिस महानिदेशक बी बी मोहंती ने गुरूवार को जयपुर की एक अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया.

पूर्व डीजीपी (होमगार्ड) विद्या भूषण मोहंती पर आरोप है कि उन्होंनें 2006 में एक जर्मन महिला के साथ बलात्कार के आरोप में सज़ायाफ़्ता अपने पुत्र बिट्टी मोहंती को फरार होने में मदद की है.

बिट्टी को 20 नवंबर 2006 से चार दिसम्बर 2006 तक पेरोल पर रिहा किया गया था. लेकिन वो पेरोल अवधि ख़त्म होने के बाद वापस नहीं लौटा.

बिट्टी को वापस जेल भिजवाने के लिए उसके पिता ने उसकी ज़मानत दी थी. पुलिस का आरोप था कि भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बी बी मोहंती ने अपने पुत्र को फ़रार करवाने मे अपने पद का दुरूपयोग किया था.

मोहंती लगातार ये कहते रहे कि उन्हें अपने पुत्र के बारे मे कोई जानकारी नहीं है और वे उसके फरार होने के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. लेकिन राजस्थान पुलिस ने उड़ीसा सरकार को भेजे काग़ज़ात मे ये साबित करने का प्रयास किया कि मोहंती अपने पुत्र से मिले हुए है.

मोहंती को गिरफ़्तार करने और उनके लड़के को पकड़ने के लिए राजस्थान पुलिस ने उड़ीसा के कई चक्कर लगाये थे लेकिन क़ामयाबी नहीं मिली थी.

मामला

हाल में मोहंती ने सुप्रीम कोर्ट मे भी राहत के लिए गुहार लगाई थी. लेकिन वहां से भी मनाही के बाद मोहंती के सामने आत्म समर्पण के अलावा कोई और चारा नहीं बचा था.

मोहंती गुरुवार की सुबह जयपुर पहुंचे और एक स्थानीय अदालत के सामने आत्म-समर्पण कर दिया.

पूरा मामला मार्च 2006 का है जब बिट्टी एक जर्मन महिला के साथ अलवर घूमने आया था. वहाँ एक होटल में कथित रूप से बिट्टी ने उस महिला के साथ बलात्कार किया.

बाद में अलवर की एक अदालत ने बिट्टी को सात साल की सजा सुनाई थी.