मंगलवार, 08 जनवरी, 2008 को 13:59 GMT तक के समाचार
संदीप साहू
बीबीसी संवाददाता, भुवनेश्वर
उड़ीसा के कंधामल में पिछले दिनों हुई हिंसा के सिलसिले में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की दो सदस्यीय टीम मंगलवार को मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से मिली.
टीम के सदस्य दिलीप पड़गाँवकर ने अधिकारियों से मिलने के बाद भुवनेश्वर में पत्रकारों को बताया कि वे अपनी रिपोर्ट अगले तीन-चार दिनों में आयोग को सौंप देंगे.
उन्होंने कहा कि वे वापस लौटने से पहले कुछ ग़ैर-सरकारी संस्थाओं के अधिकारियों से भी मिलेंगे.
उल्लेखनीय है कि गत 25 दिसंबर को क्रिसमस के मौक़े पर कई चर्चों पर हमले किए गए थे. कंधमाल ज़िले में ब्राह्मणी गाँव सहित कई गाँवों में लोगों पर भी हमले किए गए थे और ईसाई समुदाय के लोगों के घर जला दिए थे.
बाद में यह सांप्रदायिक दंगों में बदल गया था और वहाँ कई दिनों तक कर्फ़्यू लगाना पड़ा था.
यह पूछने पर कि आयोग की टीम ने कंधामल के प्रभावित इलाक़ों का दौरा क्यों नहीं किया, पड़गाँवकर ने कहा, "बड़ा क्षेत्र होने और समय की कमी होने के चलते दल का वहाँ के सभी इलाकों में जाना मुश्किल था लेकिन ज़िला मुख्यालय फुलबनी से वापस लौटते वक्त दल ने अनेक हिंसाग्रस्त स्थानों का दौरा किया."
पड़गाँवकर ने बताया कि उन्होंने हिंसाग्रस्त इलाकों बरखामा और ब्राह्मनीगाँव का पूर्वनियोजित दौरा करने के बजाए हिंसा के शिकार लोगों, सामुदायिक और धार्मिक नेताओं को फुलबनी सर्किट हाउस में बुलाकर बातचीत करना ज़्यादा मुनासिब समझा.
पड़गाँवकर ने कहा कि हालांकि वे हिंसाग्रस्त इलाके में ज़्यादा नहीं गए लेकिन दल जिन लोगों से बात करना चाहता था, उनसे बात करने में सफ़ल हो गया.
उन्होंने कहा, "दल ने मुख्यमंत्री और राज्य के सरकारी अधिकारियों से भी ज़रूरी बात कर ली है जिन्होंने उन्हें सरकार के राहत और पुनर्वास के बारे में किए गए उपायों के बारे में बताया है".
कंधामल मुद्दे पर किए गए निष्कर्षों के बारे में पूछने पर पड़गाँवकर ने कहा, "सबसे पहले यह ज़रूरी है कि हम अपना दृष्टिकोण आयोग के सामने रखें".
इससे पहले उन्होंने फुलबनी में सोमवार को पत्रकारों को बताया कि कंधामल की स्थिति बेहद नाज़ुक है और राज्य में अल्पसंख्यक काफ़ी डरे हुए हैं.
इस बीच, मुकेश सिंह की अध्यक्षता वाला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दो सदस्यीय दल भी कंधामल में हुए मानवाधिकारों के कथित हनन की मौका मुआयना करने के लिए मंगलवार को भुवनेश्वर पहुँचा. बुधवार को यह दल कंधामल जाएगा.
'माओवादियों की मदद'
इसी संबंध में उड़ीसा सरकार ने उन आरोपों की जाँच कराने का निर्णय लिया है जिनमें कहा गया है कि कंधामल ज़िले में काम कर रही ग़ैर-सरकारी संस्थाओं ने मिल रहे विदेशी फ़ंड को माओवादियों में वितरित किया.
गृह सचिव तरुण कांति मिश्रा ने कहा है कि सरकारी जाँच के अलावा, जाँच आयोग ने पहले ही कंधामल में लगाए गए आरोपों की तहकीकात के लिए एक जाँच बैठा दी है जो संज्ञान में आने पर इन आरोपों के बारे में पता ज़रूर लगाएगी.
उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही कह चुकी है कि कंधामल में हुई हिंसा में माओवादियों का हाथ होने का संदेह करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं.
इस घोषणा ने कट्टरपंथी हिंदुओं के दलों को और परेशान कर दिया है जो काफ़ी समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि विदेशी फंड का इस्तेमाल कंधामल में दलितों के धर्मपरिवर्तन के लिए किया जा रहा है.
राज्य विहिप के मुख्य सचिव गौरी प्रसाद राठ ने बीबीसी से कहा, “ब्राह्मनीगाँव में हिंदुओं पर हुए हमले ने हमारे शक को पक्का कर दिया है कि विदेशी मिशनरियों की ओर से आया फ़ंड माओवादियों के पास पहुँच रहा है."