मंगलवार, 08 जनवरी, 2008 को 20:21 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटिश सैनिकों पर हमले के लिए ज़िम्मेदार एक तालेबान कमांडर का कहना है कि उसने रिश्वत देकर जेल से अपनी रिहाई करवा ली.
मुल्ला सोर्ख़ नक़ीबुल्ला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अफ़ग़ान अधिकारियों को अपनी रिहाई के बदले 15 हज़ार डॉलर दिए.
नक़ीबुल्ला कहते हैं कि ऐसा तीसरी बार हुआ जब उनकी गिरफ़्तारी हुई और वो रिहा हो गए.
'लाल मुल्ला' के नाम से चर्चित इस तालेबान कमांडर की गतिविधियाँ हेलमंद में फैली हुई है जहाँ बड़ी संख्या में ब्रिटिश सैनिक तैनात हैं.
नक़ीबुल्ला ने बीबीसी को बताया कि पिछली बार वो पाँच महीनों के लिए जेल में रहे लेकिन अब फिर से अपने समर्थकों के बीच हैं.
उनका कहना था, "मैं 24 जुलाई को गिरफ़्तार हुआ था. मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय (एनडीएस) में भेज दिया गया. शुक्रवार को एक आदमी आया, उसने होटलवालों के पैसे दिए और मुझे छोड़ दिया."
वो बताते हैं कि कैसे वर्ष 2004 में हेलमंद में गिरफ़्तार होने के 16 माह बाद वो रिश्वत देकर काबुल के पुल-ए-चरखी जेल से बाहर आने में कामयाब रहे थे.
इसके अगले वर्ष एक बार फिर नक़ीबुल्ला पकड़े गए लेकिन नतीजा वही निकला. वो रिश्वत देकर बाहर आ गए.
उधर एनडीएस के एक अधिकारी ने बताया कि नक़ीबुल्ला चंगुल से कैसे बच निकला इसकी जाँच शुरू कर दी गई है.
तालेबान के एक प्रवक्ता ने बताया कि नक़ीबुल्ला वापस हेलमंद लौट गए हैं.