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सोमवार, 07 जनवरी, 2008 को 19:47 GMT तक के समाचार

पूर्व तालेबान कमांडर अब गवर्नर

अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत के मूसा क़ला शहर में एक ऐसे व्यक्ति को गवर्नर नियुक्ति किया गया है जो पहले कभी तालेबान कमांडर हुआ करता था.

मूसा क़ला वही शहर है जिस पर दिसंबर में अमरीकी, ब्रिटिश और अफ़ग़ान फ़ौजों ने दोबारा कब्जा किया था.

इस शहर पर नौ महीनों से तालेबानों ने कब्जा कर रखा था.

इस शहर के बाहर घमासान होता रहा और फिर हवाई हमले किए गए.

जब अफ़ग़ान नेशनल आर्मी के जवान भीतर घुसे तो तालेबान ने शहर को छोड़ दिया.

और इस लड़ाई का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि तालेबानी सेना के महत्वपूर्ण कमांडर मुल्ला अब्दुल सलाम को दलबदल करने के लिए राज़ी कर लिया गया.

अब मुल्ला अब्दुल सलाम मूसा क़ला में सरकार के विश्वस्त सिपहसलार हैं और उन्हें ज़िले का गवर्नर बना दिया गया है.

अब वे बात भी कुछ इसी अंदाज़ में कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "यह एक अच्छा अवसर है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय आपकी सहायता के लिए आ गया है...इससे आपके बच्चों का भला होगा, इससे आपको धन भी मिल रहा है. अब यह आप पर है कि आप क़ानून को लागू करें...अल्लाह के क़ानून को...."

भ्रम

एक पूर्व तालेबान कमांडर के मुँह से ये शब्द कुछ भारी प्रतीत होते हैं.

इसलिए देखना यह होगा कि जो कुछ वे कह रहे हैं उसे कार्यान्वित किस तरह करते हैं.

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सरकार से नाराज़ लोगों का दिल किस तरह जीता जाए.

मूसा क़ला में लाखों डॉलर की सहायता भेजी जा रही है लेकिन बीबीसी संवाददाता अलेस्टेयर लीथहेड का कहना है कि लोगों का विश्वास जीतना फ़ौजों के लिए आसान नहीं होगा.

अभी हाल ही में, क्रिसमस के समय संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के दो अधिकारियों को इसलिए निकाल बाहर कर दिया गया क्योंकि वे तालेबान के साथ मिल रहे थे और सौदेबाज़ी कर रहे थे.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन का कहना है कि वे तालेबान के साथ बात नहीं करते.

लेकिन मूसा क़ला के उदाहरण के बाद यह भ्रम बड़ा हो गया है कि आख़िर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अफ़ग़ानिस्तान सरकार विद्रोह से निपटने के लिए किस तरह के क़दम उठा रही है.

और यह भी क्या ये क़दम सोच-समझकर सामंजस्य के साथ उठाए जा रहे हैं?