रविवार, 06 जनवरी, 2008 को 18:06 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान ने कहा है कि वह अमरीकी फ़ौजों को अपनी ज़मीन पर अल-क़ायदा और तालेबान समर्थक चरमपंथियों की तलाश करने की अनुमति नहीं देगा.
न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक ख़बर पर पाकिस्तान ने नाराज़गी भरी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
इस ख़बर में कहा गया था कि बुश प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि सैन्य और ख़ुफ़िया कार्रवाइयों का विस्तार अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े में किया जाए.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक़ ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि पाकिस्तान की सेना चरमपंथियों से निपटने में सक्षम है.
अख़बार का कहना है कि पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की मौत के बाद की रणनीति पर विचार करने के लिए हुई एक बैठक में इस विकल्प पर विचार किया गया.
व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, उपराष्ट्रपति डिक चेनी और विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस मौजूद थीं.
इसमें विचार किया गया कि क्या अमरीका को पाकिस्तान में अपनी रणनीति बदलने की ज़रुरत है?
अख़बार का कहना है कि इसी के दौरान यह विचार आया कि क्या अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए और अमरीकी सेना की कार्रवाइयों का विस्तान अफ़ग़ानिस्तान सीमा से लगे पाकिस्तान के पहाड़ी और क़बायली इलाक़े में किया जाए.
लेकिन पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक़ का कहना है कि अमरीकी सेना को ऐसी किसी कार्रवाई की अनुमति देने का सवाल ही पैदा नहीं होता.
मोहम्मद सादिक़ ने बीबीसी से कहा, "अमरीकी सरकार जानती है और हमने पहले भी सार्वजनिक रुप से यह कहा है कि दुनिया के किसी भी देश को हम पाकिस्तानी ज़मीन पर ऐसी कार्रवाई करने की अनुमति नहीं देंगे."
उन्होंने कहा, "चरमपंथ से निपटने के लिए किसी भी तरह की कार्रवाई की ज़रुरत होगी तो वह हमारी अपनी सेना करेगी. हम इसके लिए सक्षम हैं और हम ज़रुरत के मुताबिक़ कार्रवाई करेंगे."
बढ़ती हिंसा
पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया व्हाइट हाउस की बैठक में दिए गए तर्कों के ठीक विपरीत है.
जैसी कि ख़बरें हैं उस बैठक में कुछ लोगों ने कहा था कि इस्लामिक चरमपंथियों से परवेज़ मुशर्रफ़ की सरकार को मिल रही चुनौती इतनी बड़ी है कि वे पाकिस्तानी सीमा में अमरीकी सेना को कार्रवाई की अनुमति दे सकते हैं.
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की उत्तर-पश्चिमी सीमा के पहाड़ी इलाक़ों में पिछले छह महीनों में हिंसा में बढ़ोत्तरी हुई है.
इस इलाक़ों में कट्टरपंथी इस्मामिक क़बायली गुटों और पाकिस्तानी सेना के बीच अक्सर मुठभेड़ की ख़बरें भी लगातार मिल रही हैं.
अब तक तो अमरीकी इन इलाक़ों से अपने को अलग रखे हुए था.
लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने कुठ विश्लेषकों के हवाले से कहा है कि उन इलाक़ों की स्थिति ऐसी है कि वहाँ अमरीका को सीधे दखल देना चाहिए.