गुरुवार, 03 जनवरी, 2008 को 13:54 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का कहना है कि उसकी नेता बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद पार्टी के हज़ारों कार्यकर्ता दंगा फैलाने और आगज़नी करने के आरोपों का सामना कर रहे हैं.
पीपीपी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि पुलिस ने हाल के दिनों में पूरे प्रांत में अनेक स्थानों से पार्टी के अनेक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है.
ग़ौरतलब है कि 27 दिसंबर को रावलपिंडी में बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद भड़के दंगों और हिंसा में पचास से ज़्यादा लोग मारे गए थे, उनमें ज़्यादातर सिंध प्रांत में ही थी क्योंकि उस हिंसा और आगज़नी की ज़्यादा घटनाएँ सिंध में ही हुई थीं.
सिंध प्रांत में पीपीपी के एक वरिष्ठ नेता निसार अहमद ख़ुसरो ने कहा है कि पार्टी ऐसी अनेक पुलिस रिपोर्टों की जाँच-पड़ताल कर रही है जो बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद दर्ज की गई हैं.
निसार अहमद ख़ुसरो ने कहा, "मैं आपको बता सकता हूँ कि पुलिस रिपोर्टों में सिंध प्रांत के हर ज़िले से पीपीपी के हज़ारों कार्यकर्ताओं को नामज़द किया गया है और गत रविवार से ही छापे मारे जा रहे हैं."
उन्होंने कहा, "दुख की इस घड़ी में सरकार इस तरह के हथकंडे अपनाकर माहौल को और ख़राब कर रही है."
हालाँकि निसार अहमद ख़ुसरो के पास ऐसे कोई आँकड़े नहीं थे कि पीपीपी के कितने कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है या कितनों को गिरफ़्तार किया जा सकता है.
पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता बाबर ऐवान ने डॉन समाचार टेलीविज़न को गुरूवार को बताया कि लगभग चार हज़ार पुलिस रिपोर्ट दर्ज की गई हैं जिनमें बीस हज़ार से ज़्यादा पीपीपी के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाए गए हैं.
सिंध के गृहमंत्री अख़्तर ज़मीं ने यह पुष्टि नहीं की कि दंगों और आगज़नी के आरोपों में कितने लोगों को संदिग्ध बनाया गया है. उन्होंने बीबीसी से कहा कि पुलिस को यह हिदायत कर दी गई है कि जो भी बेक़सूर होगा, उसके ख़िलाफ़ आरोप ख़त्म कर दिए जाएंगे.
गृहमंत्री अख़्तर ज़मीं ने कहा, "अगर कोई बैंक जलाया जा रहा है या फिर किसी रेलवे स्टेशन को आग की भेंट चढ़ाया जा रहा है तो नामज़द व्यक्ति वहाँ खड़ा हुआ देखा गया है तो उसके साथ किस तरह का सलूक किया जा सकता है."
चुनाव
सरकार ने आठ जनवरी को पूर्व घोषित चुनाव भी स्थगित कर दिए हैं और बुधवार की घोषणा के अनुसार अब चुनाव 18 फ़रवरी को कराए जाएंगे.
कराची में बीबीसी संवाददाता मोहम्मद इलियास ख़ान का कहना है कि बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी प्रदर्शनों के रास्ते पर जाने से बची है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर सरकार ने पीपीपी के कार्यकर्ताओं को दंगों और आगज़नी के आरोपो में गिरफ़्तार करना शुरू किया तो सरकार के साथ अदावत बढ़ सकती है.
विपक्षी दलों में अनेक नेताओं का आरोप है कि अधिकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की सुरक्षा के लिए समुचित इंतज़ाम नहीं किए थे.
चुनावों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के अधीन किस तरह की सरकार बनेगी क्योंकि परवेज़ मुशर्रफ़ अमरीका की "आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई" में एक महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं.
परवेज़ मुशर्रफ़ भारी घरेलू और विदेशी दबाव के बीच ना चाहते हुए भी नवंबर 2007 में भी सेनाध्यक्ष का पद छोड़ चुके हैं.
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का कहना है कि सेना और अर्द्धसैनिक बल "स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव" कराने के लिए पुलिस की हरसंभव मदद करेंगे.