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बुधवार, 02 जनवरी, 2008 को 17:48 GMT तक के समाचार

श्रीलंका सरकार ने युद्घविराम ख़त्म किया

श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोहियों के साथ युद्घविराम समझौता औपचारिक रूप से ख़त्म कर दिया है.

अब से छह वर्ष पूर्व 2002 में इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे.

बुधवार शाम को कैबिनेट की एक बैठक में ये फ़ैसला लिया गया. युद्धविराम ख़त्म करने का प्रस्ताव श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने रखा जिसका कैबिनेट ने सर्वसम्मति से अनुमोदन किया.

सरकार का कहना है कि देश में हिंसा की घटनाओं में बढ़ौतरी को देखते हुए नॉर्वे की मध्यस्थता से हुआ यह समझौता अब निरर्थक हो गया है.

कैबिनेट के इस फ़ैसले के बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है जो क़ानूनी पहलों पर ग़ौर करेगी. ये समिति तय करेगी कि इस निर्णय के बारे में श्रीलंका निगरानी मिशन को क़ानूनी रूप में कब और कैसे बताए.

श्रीलंका निगरानी मिशन एक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी है जो युद्धविराम पर नज़र रखता है.इसमें नॉर्वे, आइसलैंड और फ़िनलैंड शामिल है.

माना जा रहा है कि युद्धविराम ख़त्म करने के बारे में नॉर्वे सरकार को सूचना गुरुवार को भेजी जाएगी. वर्ष 2002 में नॉर्वे ने ही श्रीलंका सरकार और एलटीटीई के बीच युद्धविराम के लिए मध्यस्थता की थी.

'युद्धविराम निरर्थक था'

बीबीसी तमिल सेवा से बात करते हुए श्रीलंका के सुरक्षा मामलों के प्रवक्ता केहलिया रम्बुकवेल्ले ने कहा कि कैबिनेट इस बात पर सहमत था कि देश के ताज़ा हालात को देखते हुए युद्वविराम जारी नहीं रखा जा सकता.

प्रवक्ता ने कहा है कि एलटीटीई ने हज़ारों बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है और समस्या का शांतिपूर्ण हल निकालने का मकसद पूरा नहीं हो पाया है.

उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा ख़तरे में पड़ रही थी और अब युद्धविराम को जारी रखने की कोई सार्थकता नहीं बची थी.

लेकिन साथ ही प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार के इस फ़ैसला का मतलब ये नहीं है कि उसने एलटीटीई के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी है.

वर्ष 2006 के मध्य से ही सैनिकों और विद्रोहियों के बीच लगातार झड़पें होती रही हैं. हालाँकि यह समझौता तकनीकी रूप से प्रभावी माना जाता रहा.

अभी तमिल विद्रोहियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

विद्रोही श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में तमिलों के लिए स्वतंत्रता की मांग करते आ रहे हैं.