http://www.bbcchindi.com

सोमवार, 31 दिसंबर, 2007 को 09:01 GMT तक के समाचार

लोकतंत्र की तरफ पहला क़दम

भूटान में सदियों के राजतंत्र के बाद सोमवार को पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदान हो रहा है.

उल्लेखनीय है कि भूटान नरेश ने ही देश को लोकतंत्र बनाने का फ़ैसला किया है और उन्हीं की पहल पर ये चुनाव भी हो रहे हैं.

सोमवार को संसद के उच्च सदन के सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है.

हालांकि देश के अधिकांश नागरिकों का कहना है कि वे वर्तमान स्थितियों( राजतंत्र) से भी काफ़ी खुश हैं.

इस मतदान के बाद इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण निचले सदन के चुनाव फ़रवरी-मार्च में कराए जाएंगे जिसमें कुछ समय पहले ही बनीं राजनीतिक पार्टियां हिस्सा ले सकेंगी.

भूटान के मुख्य चुनाव आयुक्त कुंज़ांग वांगदी ने मतदान शुरु होने से पहले कहा, “हम चुनाव के लिए तैयार हैं, सभी जरूरी मशीनें सही जगहों पर लगा दी गई हैं.”

पारंपरिक पोशाक अनिवार्य

उन्होंने कहा कि देश के पाँच निर्वाचन-क्षेत्रों में चुनाव नहीं होगा क्योंकि वहां या तो सिर्फ़ एक उम्मीदवार है या कोई उम्मीदवार नहीं है.

सुबह आठ बजे मतदान शुरू होते ही देश के देउतांग कस्बे में मतदाताओं की कतारें लग गईं.

सभी अपनी पारंपरिक पोशाक जो अनिवार्य थी, पहने थे. सभी पुरुष गाउन में और महिलाएं लंबी पोशाकों में थीं. कुछ लोग अपने बच्चों को भी गोद में लिए हुए थे.

देश के 312,817 वोटरों में से एक 35 वर्षीय किसान सोनम वांगदा कहते हैं, 'मैंने कंप्यूटर का बटन दबाया. मैं अपना वाट डालकर बेहद खुश हूँ. वे उस इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बारे में बता रहे थे जिसका चुनाव में इस्तेमाल हुआ है.'

देश की सीमा को अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है.

अधिकारियों को डर है कि कहीं भेदभाव करने का आरोप लगाने वाले नेपाली मूल के भूटानी शरणार्थियों के समर्थन में नेपाल के माओवादी विद्रोही कोई हंगामा खड़ा न करें.

भेदभाव का आरोप लगाने और प्रजातंत्र की मांग करने वाले नेपाली मूल के हज़ारों लोग को 1991 में भूटान से निकाल दिया गया था.

मतदान के लिए सुरक्षा कर्मियों समेत क़रीब 15 हज़ार चुनाव अधिकारियों को तैनात किया गया है.

भूटान की राष्ट्रीय परिषद में 25 सदस्य होंगे जिनमें से पाँच को वर्तमान शासक चुनेंगे और बाकी को भूटानी नागरिक चुनेंगे.