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रविवार, 30 दिसंबर, 2007 को 04:48 GMT तक के समाचार

बेनज़ीर की वसीयत के सार्वजनिक होने का इंतज़ार

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की रविवार को अहम बैठक चल रही है जिसमें बेनज़ीर भुट्टो की राजनीतिक वसीयत को सार्वजनिक किया जाना है.

बंद कमरे में चल रही पीपीपी की बैठक में वसीयत पढ़ी जा चुकी है लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है.

ये वसीयतनामा उनके 19 वर्षीय बेटे बिलावल पढ़ेंगे. संवाददाताओं का कहना है कि बेनज़ीर के पति आसिफ़ अली ज़रदारी उत्तराधिकारी के दावेदार हो सकते हैं.

पीपीपी की बैठक नौडेरो में भुट्टो परिवार के घर पर हो रही है.

पार्टी में इस बात को लेकर संशय में है कि आठ जनवरी को होने वाले चुनावों में हिस्सा लिया जाए या नहीं.

उत्तराधिकारी कौन

इस बात की संभावना ज़ोर पकड़ रही है कि ज़रदारी को पीपीपी का नेता नामित किया जा सकता है.

पार्टी के वरिष्ठ नेता मख़दूम अमीन फहीम भी दावेदारों में शामिल हैं.

जब आसिफ़ अली ज़रदारी से बीबीसी ने पूछा कि क्या वे पार्टी के नेता बनना चाहते हैं तो उनका कहना था, इसका फ़ैसला पार्टी करेगी. ये पार्टी और वसीयतनामे पर निर्भर करता है.

बेनज़ीर भुट्टो की सरकार के दौरान आसिफ़ अली ज़रदारी ने प्रशासन में अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने पाकिस्तान में भ्रष्ट्राचार के आरोप में आठ साल जेल में बिताए जिसके बाद वे नबंवर 2004 में रिहा हुए.

कैसे हुई मौत

रविवार को हो रही बैठक में संसदीय चुनावों में हिस्सा लेने के मुद्दे पर भी चर्चा हो रही है.

इस बीच पाकिस्तान में सत्ताधारी पार्टी के अधिकारी ने कहा है कि वहाँ चुनाव कई हफ़्तों तक स्थगित किए जा सकते हैं.

पीएमएल-क्यू पार्टी के तारिक़ अज़ीम ने कहा कि अगर चुनाव आठ जनवरी को हुए तो इसकी विश्वनियता पर सवाल उठेंगे.

इससे पहले पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता नवाज़ शरीफ़ चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं.

सोमवार को पाकिस्तान चुनाव आयोग की आपात बैठक हो रही है जिसमें आम चुनाव स्थगित किए जाने पर फ़ैसला किया जा सकता है.

तारिक़ अज़ीम ने कहा कि चुनाव स्थगित होने से पीपीपी को ये मौका मिल सकेगा कि वो दोबारा संगठित हो सके. उनका कहा था कि माहौल ऐसा नहीं है जिसमें चुनाव प्रचार हो सके.

इस बीच बेनज़ीर भुट्टो की मौत कैसे हुई इसे लेकर विवाद जारी है. पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि अगर बेनज़ीर भुट्टो का परिवार और पार्टी चाहेगी तो सरकार उनका शव क़ब्र से निकालने को भी तैयार है ताकि उनका पोस्टमार्टम किया जा सके.

बेनज़ीर समर्थकों का कहना है कि उनकी नेता की मौत गोली लगने से हुई. लेकिन पाकिस्तान की सरकार का तर्क है कि बेनज़ीर को ना तो गोली लगी और ना ही बम के छर्रे.