गुजरात में मतदान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी हित के ख़िलाफ़ काम करने के आरोप में राज्य के चार क़द्दावर नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है.
गुजरात से दो सांसदों को पार्टी ने निलंबित कर दिया है जबकि दो वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
निलंबित सांसद हैं- वल्लभ भाई कथिरिया और सोमाभाई पटेल. जबकि गुजरात में एक समय पार्टी की रीढ़ माने जाने वाले दो वरिष्ठ नेताओं केशुभाई पटेल और कांशीराम राणा को नोटिस जारी किया गया है.
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने बताया, "पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाती और अनुशासन बरकरार रखने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने गुजरात के चार नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है."
नोटिस
केशुभाई पटेल और कांशीराम राणा को सात दिनों के अंदर कारण बताओ नोटिस का जवाब देने को कहा गया है. गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के कई नेताओं ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ विद्रोही तेवर अपनाए थे.
कई नेताओं ने तो कांग्रेस के मंच से भाषण तक दिए थे. जानकारों का कहना है कि उस समय भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव को देखते हुए उन पर कार्रवाई नहीं की.
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बोलने वाले सुरेश मेहता ने तो चुनाव के दौरान ही भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ लिया था और अब एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को पार्टी ने नोटिस जारी कर दिया है.
प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी की गई. उन्होंने कहा, "समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर पार्टी हितों के ख़िलाफ़ बात की गई. और इसी कारण ये कार्रवाई की गई है."
गुजरात विधानसभा के लिए दो चरणों में मतदान हो चुके हैं और मतगणना 23 दिसंबर को होगी.