बुधवार, 19 दिसंबर, 2007 को 20:03 GMT तक के समाचार
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा मुख्यमंत्रियों की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने 11वीं पंचवर्षीय योजना में अल्पसंख्यकों को विशेष रियायतों पर आपत्ति जताई थी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की कोई कोशिश नहीं की गई है.
उनका कहना था कि 11 वीं योजना में समाज के अत्यंत गरीब और वंचित तबके पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में 11वीं योजना के दस्तावेज़ को मंजूरी दिए जाने से पहले कहा कि इस योजना का लक्ष्य वंचित लोगों को आर्थिक विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाना है.
उनका कहना था कि योजना में लोगों को जाति, रंग, लिंग या धर्म के आधार पर बांटने की कोई कोशिश नहीं की गई है.
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बात सही है कि कुछ सामाजिक समूह विकास के लिहाज से बदतर स्थिति में हैं, इस योजना में ऐसे लोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
भाजपा की आपत्ति
इसके पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में अल्पसंख्यकों को दी जाने वाली विशेष रियायतों की समीक्षा की मांग की थी.
दिल्ली में योजना की स्वीकृति के लिए आयोजित राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों के तहत अल्पसंख्यकों के लिए 15 फ़ीसदी बजट के प्रावधान की समीक्षा होनी चाहिए.
मोदी ने कहा, '' नया 15 सूत्रीय कार्यक्रम विभिन्न योजनाओं के लाभान्वितों के लिए उनके अल्पसंख्यक दर्जे के हिसाब से बनाया गया है. देश के सामाजिक ढाँचे को बनाए रखने के लिए इसकी समीक्षा ज़रूरी है.''
उन्होंने कहा, '' अल्पसंख्यकों पर पैसे की बारिश और लाभान्वितों के बीच भेदभाव से भारत को विकास के पथ पर ले जाने में मदद नहीं मिलेगी.''
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का पूरा ध्यान अपने ‘वोट बैंक’ पर है.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने भी केंद्र की इस 15 सूत्रीय योजना का विरोध किया.
उनका कहना था,'' हम चाहते हैं कि रियायतों का लाभ समाज के सभी तबकों को मिलना चाहिए. सभी को न्याय मिले, लेकिन तुष्टीकरण के आधार पर इस तरह के प्रावधान का हम विरोध करते हैं.''