http://www.bbcchindi.com

बुधवार, 19 दिसंबर, 2007 को 04:10 GMT तक के समाचार

विनीत खरे
बीबीसी संवाददाता, शिमला से

हिमाचल प्रदेश में 67 प्रतिशत मतदान

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 67 प्रतिशत मतदान हुआ है..

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी.

इस चरण में 65 विधानसभा सीटों के लिए मत डाले गए. कुल 324 उम्मीदवारों के भाग्य का फ़ैसला होना है. पहले चरण में तीन सीटों के लिए मतदान हुआ था.

दूसरे और अंतिम चरण में लगभग 45 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

सुबह आठ बजे से शुरू हुए मतदान की गति शुरूआत की तीन घंटों में धीमी रही और सिर्फ़ 10 से 15 फ़ीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

दोपहर में मतदान ने ज़ोर पकड़ा और शाम होते होते मतदान क़रीब 67 प्रतिशत रिकार्ड किया गया.

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

मतदान के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और लगभग 16 हज़ार पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों की 23 कंपनियां तैनात की गई. मतगणना 28 दिसंबर को होगी.

छिटपुट घटनाओं को छोड़ मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुआ.

बुधवार को मत डालने वाले प्रमुख लोगों में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार, विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा शामिल हैं.

चुनाव के इस चरण में मुख्य मुक़ाबला सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच है.

भाजपा की कमान प्रेम कुमार धूमल के हाथ में है और कांग्रेस का नेतृत्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कर रहे हैं.

दोनों के अंदाज़ अलग हैं, हमले करने की भाषा भी अलग. और ख़ासकर जिस तरह दोनों नेताओं ने चुनावी प्रचार को अंजाम दिया, वो उनके पार्टी के रुख़ को स्पष्ट करने वाला था.

भाजपा का निशाना

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के तेवर काफ़ी तीखे रहे. प्रेम कुमार धूमल हों या सुषमा स्वराज सभी ने मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए.

दूसरी ओर मुख्यमंत्री या राजा साहेब, जिस नाम से लोग उन्हें जानते हैं, ने इन आरोपों को निराधार बताया और अपने कार्यकाल के दौरान हुए विकास के काम के बारे में ज़्यादा बात की.

उधर, प्रेम कुमार धूमल के विरोधी माने जाने वाले शांता कुमार ने बीबीसी को बताया कि उन्हें नहीं मालूम कि पार्टी हाई कमान ने ये निर्णय क्यों किया.

शांता कुमार ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन सिद्धांतों के मुताबिक बिताने की कोशिश की है, और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी और इसके लिए वो गौरवान्वित हैं.

शांता कुमार का कहना था कि पार्टी के निर्णय से उनके समर्थक निराश थे. लेकिन अब सब ठीक है और इसका चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.